- पतंगों के साथ अभी भी उड़ता नजर आ रहा चाइनीज मांझा
- न बिक्री रुकी और न ही मौतों का सिलसिला, घातक मांझे पर प्रतिबंध
जौनपुर। चायनीज मांझे ने रंग-बीरंगे पतंग बाजी का त्योहार अब बेरंग होती जा रही है, इसका सीधा कारण दुकानदार अधिक धनोपार्जन के चक्कर में जनपद में हो रही लगातार घटनाओं ने त्योहार को फीका कर दिया। डॉक्टर की दर्दनाक मौत के बाद जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सख्त हो गई है, घटना के बाद जनपद में प्रतिबंधित चायनीज मांझे के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को चायनीज मांझे से होने वाले जानलेवा खतरों के प्रति सचेत किया गया। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने कई दुकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित चायनीज मांझा बरामद किया। प्रशासन ने साफ किया है कि चायनीज मांझा न केवल मानव जीवन के लिए बल्कि पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए भी अत्यंत घातक है। बता दें कि वर्ष 2009 से ही घातक मांझा पर प्रतिबंध है, इसके बावजूद न ही इसपर रोक लग सकी न ही मौतों का सिलसिला थमा, प्रशासन के तमाम दावों के बीच नगर समेत ग्रामीण अंचलों में इसे बेचा जाता है। नगर के ताड़तला, नवाब युसुफ रोड, सिपाह, शाही किला, लाइन बाजार, पुरानी बाजार, रूहट्टा, ओलंदगंज, चहारसू, नखास, पालिटेक्निक चौराहा सहित आदि इलाकों में प्रतिबंधित मांझा बेचे जाने का प्रमुख केंद्र है। अधिक से अधिक पतंग काटने के लिए इस मौत की डोर का इस्तेमाल किया जाता है। जानकार बताते हैं कि नायलान और एक मैटेलिक पाउडर को मिलाकर इसे बनाया जाता है। पुलिस समय-समय पर इसे लेकर कार्रवाई करती जरूर है, लेकिन प्रतिबंधित मांझा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध नहीं लक पा रहा है।



