जौनपुर धारा, जौनपुर। रैबीज संक्रमित कुत्ता काटने के कारण शत-प्रतिशत रैबीज होने का जोखिम होता है। लेकिन यह कोई जरूरी नहीं है कि हर काटने वाला कुत्ता संक्रमित हो। इसलिए कुत्ता काटने के बाद दस-बारह दिन तक काटने वाले कुत्ते की निगरानी की जानी चाहिए। क्योकि अगर कुत्ता रैबीज बीमारी से संक्रमित है तो दस-बारह दिन से ज्यादा वह जीवित नहीं रहता। बल्कि दस दिन के अंदर उसकी मृत्यु हो जाती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति, बडे़-बूढे, बच्चे-बच्चियों को काट ले तो कुत्ते काटने की रैबीज इंजेक्शन शिड्यूल व सारणी अनुसार अवश्य लगवाएं। यदि काटने वाला कुत्ता दस दिन के अंदर मर जाता है तो शिड्यूल अनुसार टीका पूर्ण करें। किसी भी हाल में उसे न छोडे़। कुत्ता काटने के स्थान के अनुसार रैबीज के संक्रमण में जल्दी व देरी हो सकती है। जैसा कि अगर कुत्ता सर एवं उसके आस-पास काटता है या गहराई में जख्म बन जाता है तो उसका संक्रमण तेजी के साथ फैलता हैं। लेकिन यदि उसने हल्का सा खरोच लगाया है या ज्यादा गहराई में नहीं काटा है या पैर के निचले हिस्से में काटा है तो इससे संक्रमण फैलने में समय लगता है। वह समय एक माह से बारह वर्ष तक हो सकता है। यदि रैबीज संक्रमण, शरीर में किसी भी जानवर के काटने के कारण दाखिल हो गया है तो मृत्यु सुनिश्चित है। क्योंकि रैबीज की मृत्यु दर शत-प्रतिशत पाया जाता है। रैबीज संक्रमण फैलने न पाए जिसके लिए सभी सामु.स्वा.केन्द्र तथा जिला चिकित्सालय एवं कुछ प्रा.स्वा.केन्द्र पर रैबीज टीका उपलब्ध है एवं निःशुल्क लगाए जाते हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आम-जनमानस से अनुरोध है कि कुत्ता, बिल्ली, जंगली जानवर, जैसे, बंदर, लोमड़ी, सियार एवं अन्य कोई जानवर किसी कारण काट लेता है तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर जाकर रैबीज टीका अवश्य लगवाएं।
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E-Paper 19-04-2026
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