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कल्याण का स्त्रोत है शिव, जीव के अंदर के प्रेमभाव को कहतें हैं पार्वती : स्वामी बनवासी राम

जौनपुर धारा, सिरकोनी। भगवान की भक्ति के लिए कोई खास दिन निर्धारित नहीं किया गया। सावन भादो का जो महत्व तुलसी साहित्य में देखनों को मिलता है। कि’वर्षा ऋतु रघुपति भगति,तुलसी साल सुदास। राम नाम वर वर्णन युग,सावन भादो मास, इस उदाहरण का अभिपर्याय यह रहा है। जैसे ग्रीष्म के आतप से आक्रांत प्राणी को वर्षा के आरम्भ में सुख और शांति का अनुभव होता है। उसी प्रकार सांसारिक विषय भेगों से मन को हटा कर कल्याण स्वरूप किसी तत्वदर्शी महापुरुष में लगाने से मन को शांति का अनुभव होने लगता है और मन को लगाने का माध्यम नाम है। जिसमें राम नाम कलिकाल के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस नाम को आरंभ में मुख से बोल के फिर गले में ही बोलकर, सुनकर और आगे चलकर स्वास पर उसकी गति के साथ जपकर शिव के साथ अपना सानिध्य पुष्ट किया जाता है। यही पुष्ट किया जाना पार्वती का शिव के लिए तप करना है और पुष्ट हो जाने के बाद पार्वती का शिव से विवाह होना है।

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