- गोवंश तस्करों के पैर में गोली मारने वाली पुलिस कटघरे में
- सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पुलिस ने नहीं किया अनुपालन, विवेचक थानाध्यक्ष तलब
जौनपुर धारा, जौनपुर। मुठभेड़ में आरोपित गोवंश तस्करों के पैर में गोली मारना इस बार पुलिस को महंगा पड़ गया। एसीजे प्रथम विवेक विक्रम की अदालत ने एनकाउंटर से संबंधित सभी पुलिस वालों के विरुद्ध हत्या के प्रयास व अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत हुआ है या नहीं इस संबंध में आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार यदि पुलिस मुठभेड़ में आरोपित के पैर में गोली लगती है तो पुलिस पार्टी के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और इसकी विवेचना अन्य जांच एजेंसी से कराई जानी चाहिए। यदि पुलिस के विरुद्ध कोई मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है तो यह उच्चतम न्यायालय के आदेश का घोर उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि जिस हथियार से आरोपितों पर गोली चलाई गई उस असलहे व खोखे को भी माल मुकदमाती के रूप में जमा कराएं। सुप्रीम कोर्ट के सभी दिशानिर्देशों का पालन कर 3 मई को विवेचक थानाध्यक्ष न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आख्या प्रस्तुत करें। आरोपितों को भी जिला कारागार से लाकर पेश किया जाए। आदेश का अक्षरश: अनुपालन न होने की दशा में प्रकरण को उच्च न्यायालय इलाहाबाद, प्रमुख सचिव गृह उत्तर प्रदेश शासन व डीजीपी को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया जाएगा। मालूम हो कि केराकत थाने के मुफ्तीगंज पसेवां संपर्क मार्ग पर रविवार की रात पिकअप सवार गोवंश तस्करों व पुलिस की मुठभेड़ में दोनों तरफ से गोलियां चलीं। आजमगढ़ का आरोपित समीउल्लाह और सरायख्वाजा का अरमान घायल हुआ। दोनों के पैर में गोली लगी। इसके अलावा फरहान व जीशान को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। चारों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और 14 दिन की रिमांड की मांग किया।


