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Jaunpur Dhara 18-08-2026

Jaunpur Dhara E-Paper का आज का अंक यहां पढ़ें। जौनपुर धारा समाचार पत्र में जौनपुर और आसपास की स्थानीय खबरों, उत्तर प्रदेश समाचार और प्रमुख घटनाओं की ताजा जानकारी प्राप्त करें।
Homeअपना जौनपुरधूमधाम से मनाया गया दशहरा, समितियों ने विसर्जित किया प्रतिमा

धूमधाम से मनाया गया दशहरा, समितियों ने विसर्जित किया प्रतिमा

  • असत्य पर सत्य की जीत के साथ ही दहन किया गया रावण
  • प्रतिमाओं के आगे-पीछे लगी लम्बी कतारें, उड़े अबीर-गुलाल

जौनपुर धारा, जौनपुर। विजयादशमी के अवसर पर दुर्गा प्रतिमाओं का विजर्सन सद्भावना पुल के समिप स्थित विसर्जन घाट पर बने शक्ति कुण्ड में संपन्न हुआ। दोपहर बाद से ही ट्रैक्टरों की ट्रालियों पर मां की प्रतिमाओं की झॉकी बनाकर शोभा यात्रा निकाली गयी। प्रतिमाओं के आने का क्रम अगले दिन बुधवार तक चलता रहा। प्रतिमाओं के आगे पीछे श्रद्धालुओं की लंबी कतारें अबीर-गुलाल उड़ाती हुयी चल रही थी। मां के जयकारे की गगनभेदी गूंज से वातावरण भक्तिमय हो चला। इस दौरान दोपहर से ही चलने वाला मेला असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयादशमी हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। राम-रावण युद्ध के बाद अहंकार रूपी रावण के विशालकाय पुतले में आग लगते ही राजा श्रीरामचंद्र के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। जिलेभर में जगह-जगह ऐतिहासिक मेले का आयोजन किया गया।

मंगलवार को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन प्रारम्भ किया गया, और एक के बाद एक पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जित की गई। दुर्गापूजा महासमिति का आकड़ा माना जाये तो कुल लगभग 2200 मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। सद्भावना पुल के समीप शक्ति कुंड बनाकर दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की गई। प्रशासन की तरफ से विसर्जन व सद्भावना पुल के पूर्वी तरफ जेसीबी से खोदकर काफी विशालकाय शक्ति कुंड बनाया गया था। पुलिस विभाग ने भी प्रतिमा विजर्सन की तैयारियां पूरी कर ली थी। जिन जिन रास्तों से प्रतिमाएं जा रही थी, उन-उन मार्गों से दुपहिया और चार पहिया वाहनों के आने पर रोक लगा दी गयी थी। इसी प्रकार ग्रामीणांचल में भी प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम से किया गया। वहीं नगर में श्री रामलीला समिति हुसेनाबाद के तत्वाधान में रामलीला मैदान से रथ पर सवार राम और रावण युद्ध करते हुए टीडी कालेज, बीआरपी कालेज और रोडवेज तिराहा होते हुए जेसीज चौराहे पर पहुंचकर रावण का विशालकाय वाला पुतला दहन हुआ, रावण जलते ही मेले में मौजूद हजारों दर्शकों ने गगनचुंबी जय श्रीराम का उद्घोष किया। रंग बिरंगी आतिशबाजी से पूरा माहौल जश्न में बदल दिया।

उधर पंडित जी रामलीला समिति के तत्वावधान में काली जी मंदिर सब्जी मंडी से राम-रावण युद्ध करते हुए रथ निकला। यह रथ कोतवाली, अल्फस्टीनगंज, खासनपुर होते हुए राजा साहब के पोखरे पर पहुंचा। दशहरे के दिन ही भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। इसी की खुशी में दशमी तिथि को विजयादशमी को पर्व के रूप में मनाया जाता है। युद्ध में विजय के कारण और पांडवों से जुड़ी एक कथा की वजह से विजयदशमी को हथियार या शस्त्र पूजने की परंपरा भी है। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पावन पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। श्रीराम ने इस दिन रावण के अहंकार को चूर-चूर कर यह शिक्षा दी कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अहंकार लोभ, लालच और अत्याचारी प्रवृत्तियां त्यागकर मानव मात्र की सेवा के लिए जीवन जीना चाहिए।