- मेडिकल कॉलेज के कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार का मामला
- लिखित शिकायत पत्र के बाद भी नहीं हुई कोई जांच
जौनपुर धारा,जौनपुर। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (राजकीय मेडिकल कॉलेज) सिद्दीकपुर में कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और अभद्र व्यवहार का मामला फिर चर्चा का विषय बन गया। यह मामला सिर्फ दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिकायत करने करने के बाद मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा दिया गया असंवेदनशील और अपमानजनक जवाब मामले को और भी गंभीर बना गया है।
मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनात कई महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने परमानेंट नर्सिंग ऑफिसर जुबेर और राहिला के खिलाफ जातिगत टिप्पणी, अभद्र भाषा के प्रयोग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस संबंध में लिखित शिकायत भी की, लेकिन सीएमएस डॉ.ए.ए.जाफरी ने उनके पत्र को गंभीरता से लेने के बजाय यह कहकर टाल दिया कि पत्र देकर तोप नहीं मार ली और उल्टे पत्र वापस लेने का दबाव बनाया।
खुशबू यादव का कहना है कि जब उन्होंने इस घटना की शिकायत नर्सिंग इंचार्ज राहिला से की, तो उसने भी डांटते हुए उन्हें भगा दिया। इसके बाद जब उन्होंने सीएमएस डॉ.ए.ए.जाफरी को लिखित शिकायत दी तो उनका रवैया और भी चौंकाने वाला था। बल्कि यह भी कहा कि यदि जांच बैठाई गई तो खुशबू की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है। इस मामले की गंभीरता को लेकर हुए उम्मीद की जा रही थी कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन तुरंत कार्रवाई करेगा, लेकिन अब तक किसी प्रकार की जांच या दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है। इससे पीड़ित कर्मचारियों में रोष और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। खुशबू यादव ने अपने शिकायत पत्र में यह भी बताया कि ड्यूटी पर समय से पहुंचने के बावजूद उनकी हाजिरी अनुपस्थित दर्ज कर दी गई। जब उन्होंने इसकी जानकारी संबंधित सिस्टर से मांगी, तो जवाब मिला कि किसने अनुपस्थित लगाया, इसका उन्हें कोई ज्ञान नहीं है। यह घटना साफ संकेत देती है कि शिकायत करने के बाद से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
ड्यूटी के दौरान किया गया दुर्व्यवहार
मामला 29अप्रैल की रात का है जब नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात खुशबू यादव अन्य महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आईपीडी भवन में खाली पड़े बेड को व्यवस्थित कर रही थीं। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद परमानेंट नर्सिंग ऑफिसर जुबेर ने उन्हें अपमानजनक भाषा में फटकारा और कहा कि वे बाहर जाकर पुरुष स्टाफ के साथ बैठें। जब खुशबू यादव ने इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें अकेले जाकर पुरुष स्टाफ के साथ बैठने के लिए कहा गया जिससे उन्हें मानसिक उत्पीड़न पहुंचा।
दो अन्य महिला स्वास्थ्यकर्मियों की भी अलग शिकायत
केवल खुशबू यादव ही नहीं, बल्कि मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर (जनरल) के पद पर कार्यरत अंजू और जमीला ने भी 30 अप्रैल की रात अपने साथ हुए अपमानजनक व्यवहार की शिकायत की है। उनके अनुसार जब वे वार्ड में खाली पड़े बेड पर बैठी थीं, तो जुबेर और अन्य दो नर्सिंग कर्मियों ने उन्हें अपमानजनक भाषा में डांटा और वहां से हटाया। आरोप है कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहे गए और शौचालय की चाबी देने से भी मना कर दिया गया। महिला स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि यह न सिर्फ उनके आत्मसम्मान पर हमला है, बल्कि उनके पेशेवर अधिकारों का भी हनन है। उन्होंने कॉलेज प्राचार्य से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
सीएमएस की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे गंभीर सवाल सीएमएस डॉ. ए. ए जाफरी के रवैये पर उठ रहे हैं। एक तरफ जहां शिकायतों पर कार्रवाई न करना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित कर्मचारियों को पत्र वापस लेने का दबाव बनाना पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना और असंवेदनशील आचरण है। उनका यह कहना कि “पत्र देकर तोप नहीं मार ली” इस पूरे मामले की गंभीरता को हल्के में लेने और महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। इस घटना के बाद से मेडिकल कॉलेज प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। अब तक किसी अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी व्यवस्था ही दोषियों को बचाने में जुटी है या फिर इस मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले की जानकारी लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ.ए.ए.जाफरी को फोन किए लेकिन उनका $फोन नहीं रिसीव हुआ। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर रुचिरा सेठी संपर्क किया गया, लेकिन उनका $फोन नहीं उठा।


