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ध्वनि प्रदूषण: विकास की शोर में दम तोड़ती शांति और सेहत

ध्वनि प्रदूषण आज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। जौनपुर जैसे शहरों में ट्रैफिक, लाउडस्पीकर और अनियंत्रित शोर लोगों की मानसिक शांति और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं।
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वाराणसी में मिली अनोखी मछली, चार आंख व अजीब मुंह बना चर्चा का विषय

वाराणसी। हरहुआ विकासखंड के कोईराजपुर गांव की वरुणा नदी में एक बेहद दुर्लभ और विशेष प्रजाति की मछली मिलने से लोग हैरान हैं। यह मछली रविवार को एक मछुआरे के जाल में फंसी, जिसे बाद में रिंग रोड फेज दो के किनारे स्थित संस्कार ढाबा के सामने पानी की टंकी में सुरक्षित रखा गया।

मछली की पहचान कुछ लोग करचामा मछली के नाम से कर रहे हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में हाइपोस्टोमस प्लीकोस्टोमस या अमेज़न सेलफिन कैट$िफश कहा जाता है। ढाबा संचालक सुरेंद्र यादव के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन में ऐसी मछली कभी नहीं देखी। उनके साथ मौजूद मनीष राय, दीनू पाल और भगवान दास ने भी यही बात कही। जैसे-जैसे मछली की खबर फैली, आस-पास के गांवों से लोग इस अजीबोगरीब जलीय जीव को देखने के लिए पहुंचने लगे। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि यह मछली वरुणा नदी में कैसे पहुंची। हालांकि, अभी तक वन विभाग या मत्स्य पालन विभाग को इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है। नमामि गंगे से जुड़े हुए दर्शन निषाद ने बताया कि इस तरह की मछलियां अमेजन की नदियों में पाई जाती हैं। बाढ़ के कारण बहकर इधर आ गई होंगी। ये मांसाहारी होती हैं। जलीय जीवों के अंडों को चूसकर जिंदा रहती हैं। धनतुलसी गांव के मछुआरा कप्तान चौधरी शुक्रवार को मछली पकड़ रहे थे। इस दौरान उनके जाल में दुर्लभ प्रजाति की मछली फंस गई। मछुआरे चार आंख वाली मछली देखकर दंग रह गए। वह उसे अपने साथ घर ले गए। औराई रेंजर राहुल सिंह कौशिक ने बताया कि मछली का यह प्रजाति यहां नहीं पाई जाती।

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