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E-Paper 03-11-2026

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पूर्व विधायक पं. सूर्यनाथ उपाध्याय की पुण्यतिथि आज

पूर्व विधायक पं. सूर्यनाथ उपाध्याय की पुण्यतिथि आज
  • जेल में रहते हुए बनाया था क्रान्तिकारी संगठन

जौनपुर धारा, सिकरारा। दिवंगत कांग्रेस नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व विधायक पं. सूर्यनाथ उपाध्याय का जन्म 16 जनवरी 1918 को विकास खंड के देहजुरी गोपालपुर गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता पूर्णमासी उपाध्याय की प्रेरणा से आजादी की लड़ाई में कूदे सूर्यनाथ ने सन 1938 में सत्याग्रह में भाग लिया तो 18 मार्च 1941 को पहली बार गिरफ्तार हो गए। नौ माह कठोर कारावास हुआ। सौ रुपये जुर्माना न देने पर तीन माह सजा और बढ़ा दी गई। उन्होंने जेल में रहते हुए जबरदस्त क्रांतिकारी संगठन बना लिया। जेल से छूटने के बाद सिरसी, बरईपार के शिव मंदिर पर क्रांतिकारियों की बैठक में उन्हें संगठन का कमांडर चुना गया। उनकी अगुवाई में मछलीशहर तहसील पर आजादी के दीवानों ने धावा बोला और सुजानगंज थाना लूट लिया। ताहिरपुर में बने राजा बनारस की छावनी को तहस नहस कर दिया। कई गोदाम, डाकखाने लूटने के साथ बरगुदर पुल तोड़ने का प्रयास किया। इस संगठन से अंग्रेजी हुकूमत इस कदर बौखला गई कि पं. सूर्यनाथ को गोली मारने का हुक्म जारी कर दिया साथ ही दस हजार का इनाम। 16 अक्टूबर 1942 को कुल्हनामऊ में डाक लूटने के बाद कुछ गद्दारों के कारण सूर्यनाथ अपने साथियों बैजनाथ सिंह, दुखरन मौर्य, उदरेज सिंह, शिवव्रत सिंह सहित गिरफ्तार कर लिए गए। गिरफ्तारी के बाद अंग्रेजों ने उनका घर फुंकवा दिया। सात वर्ष कठोर कारावास के बाद सौ रुपये जुर्माना न देने पर सजा 18 महीने और बढ़ा दी गई। सजा पूरी होने के बाद दूसरे केस में फंसाकर 24 साल की सजा 1943 में वाराणसी सेंट्रल जेल में 15 दिन तक अनशन पर रहे। हरदोई रेलवे स्टेशन पर नारा लगाते समय पुलिस से नोक-झोंक हुई तो अपशब्द कहने पर लोटे से प्रहार कर अंग्रेज अधिकारी का सिर फोड़ दिया। जेल में सख्त पहरा के बावजूद भागते समय अंतिम फाटक पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजों ने खपींचे ठोंककर उनके नाखून उखड़वा लिए। इतनी बर्बरतापूर्ण यातना दी कि शरीर से मांस के लोथड़े लटक आए। कैदियों ने समझा कि सूर्यनाथ की मौत हो गई। 12 दिन बेहोशी के बाद जब उन्हें होश आया तो साथियों की जान में जान आई। आजादी के बाद फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से 1962 में सिकरारा के ब्लाक प्रमुख और 1969 में रारी के विधायक बने। 1980 से 1982 तक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। रारी से 1980 में पुन: उपचुनाव में विधायक बने। उसके बाद मड़ियाहूं से विधायक चुने गए। 8 जनवरी 1998 को देहांत हो गया। जिनके दो पुत्र राजबली उपाध्याय व अभयराज उपाध्याय के साथ पौत्र संजय उपाध्याय, अनिल उपाध्याय, अविनाश उपाध्याय (कान्हा) व अवनीश उपाध्याय (लल्ला) शिक्षणकार्य सहित समाजसेवा में लगे हैं।