― Advertisement ―

spot_img
Homeअपना जौनपुरडॉ.बहादुर अली खा पर प्रशासन ने कसा शिकंजा

डॉ.बहादुर अली खा पर प्रशासन ने कसा शिकंजा

  • केराकत के चर्चित डॉ.बहादुर अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज

जौनपुर धारा, केराकत। स्थानीय कस्बे में स्थित सरकारी जमीन पर अवैध ढंग से कब्जा कर मदरसा बनवाने तथा हिन्दुओं की भावना आहत करने पर केराकत कोतवाली थाना पुलिस ने डॉ.बहादुर अली खां और उसके तीन सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हलांकि मुकदमा चार दिन पहले ही दर्ज हुआ है। लेकिन एफआईआर की कॉपी शुक्रवार को प्रकाश में आई है।

शिकायत है कि नरहन गांव निवासी चर्चित डॉ.बहादुर अली ने केराकत कस्बे के मेंहदीतला मोहल्ले में स्थित तालाब आराजी संख्या 173 के क्षेत्रफल 0.065 हेक्टेयर पर अवैध ढंग से कब्जा कर मदरसा बनवा लिया है। केराकत तहसील के चन्दवक थाना क्षेत्र के सिधौनी गांव निवासी पंकज कुमार सिंह ने इसकी जिलाधिकारी से शिकायत की थी। शिकायत यह भी थी कि बहादुर अली और उसके सहयोगियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया। जिलाधिकारी के आदेश पर राजस्व टीम ने शिकायत की स्थलीय जांच और पैमाइश की। शिकायत सही मिलने पर जिलाधिकारी के आदेश और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर केराकत कोतवाली थाना पुलिस ने बहादुर अली खां, तथा उसके सहयोगियों मेंहदीतला के निजामुद्दीन अंसारी, और रेहान अंसारी तथा दलाल टोला मोहल्ला के गुफरान अंसारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295, 295 ए, 504,506 तथा सार्वजनिक सम्पति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3/5 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मालूम हो कि वर्ष 2016 में 15 अगस्त के दिन इसी मदरसा के छात्रों ने प्रभात फेरी के समय पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे। तब इस मदरसा के संचालक डॉ.बहादुर अली का नाम तेजी से उछला था। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। राष्ट्रप्रेमी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया तो तत्कालीन सरकार ने लाठी चार्ज कराया था। मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को थानागद्दी बाजार में आयोजित एक सभा में बोलना पड़ा था। आरोप यह भी है कि बहादुर अली ने हकीमी से अकूत संपत्ति अर्जित की है। समय-समय पर उस पर देश विरोधी और समाज विरोधी तत्वों को पनाह देने के आरोप भी लगते रहे हैं। विवादित जमीनों को क्रय कर उस पर धनबल से कब्जा करना भी उसकी फितरत है। उसके खिलाफ वैसे तो कई लोगों ने तहरीरें दीं लेकिन अनेक लालची सरकारी कर्मचारियों ने उसे दफन कर दिया। यह पहली बार है जो अवैध कब्जे की शिकायत पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। इस मामले में अगर जमीनी स्तर पर गहनता से जाँच कराई जाय तो कई लोगों का पर्दा फास हो सकता हैं।

Share Now...