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जंतर-मंतर की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग, राष्ट्रपति और मानवाधिकार आयोग को भेजा ज्ञापन

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन की घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन ने राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजकर घायलों को न्याय और सहायता दिलाने की मांग की।
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महिलाओं की निजता भंग करने का आरोप, पीड़ित परिवार ने एसपी से मांगी निष्पक्ष जांच

तेज़ीबाजार। महिलाओं की निजता भंग करने का आरोप लगाते हुए तेज़ीबाजार थाना क्षेत्र के खुटहापुर गांव निवासी एक परिवार ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने गांव के कुछ लोगों तथा स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

भूमि विवाद के बाद बढ़ा विवाद

पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार 20 मई 2026 की रात विपक्षी पक्ष के कुछ लोग भोजन कराने के बहाने उनके घर पहुंचे थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भूमि विवाद को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो बाद में गाली-गलौज और मारपीट में बदल गई।

परिवार का कहना है कि इस दौरान लाठी-डंडों से हमला किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई।

महिलाओं की निजता भंग करने का आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार 3 जून 2026 को घर की महिलाएं स्नान कर रही थीं। आरोप है कि उसी दौरान कुछ लोग दीवार पर चढ़कर वीडियो बनाने का प्रयास करने लगे। विरोध करने पर महिलाओं के साथ मारपीट की गई और घर में घुसकर पथराव भी किया गया।

परिवार ने दावा किया कि घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई थी।

पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल

पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। शिकायत में कहा गया है कि घायल सदस्यों को चिकित्सीय परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें समुचित सुविधा नहीं मिली।

परिवार का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में भी विपक्षी पक्ष दबाव बनाता रहा, जबकि उनके पक्ष की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका

प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मी बिना वारंट घर में दाखिल हुए। शिकायतकर्ताओं ने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने और मोबाइल फोन में मौजूद वीडियो हटवाने का भी आरोप लगाया है।

परिवार ने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं की निजता भंग करने की शिकायत के बावजूद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसे लेकर उन्होंने निष्पक्ष जांच कराने और वास्तविक तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।