फुटफॉल में 50 प्रतिशत तक गिरावट, कारीगरों पर बढ़ा संकट
जौनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित अपील के बाद जौनपुर के सर्राफा बाजारों में कारोबारियों ने ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट का दावा किया है।
शादी-विवाह के सीजन में जहां सामान्य दिनों में बाजारों में भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब प्रमुख ज्वेलरी शोरूमों और पारंपरिक दुकानों पर सन्नाटा नजर आ रहा है।
व्यापारियों के अनुसार बाजार में ग्राहकों की आवाजाही में करीब 50 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।
उनका कहना है कि लोग नए आभूषण खरीदने के साथ-साथ पुराने सोने के एक्सचेंज से भी दूरी बना रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है।
शादी-विवाह के सीजन में भी बाजार पड़ा सुस्त
आमतौर पर इस समय सर्राफा बाजार में सबसे अधिक रौनक रहती है। विवाह समारोहों और पारिवारिक आयोजनों के चलते आभूषणों की खरीदारी अपने चरम पर होती है, लेकिन इस बार बाजार की स्थिति अलग दिखाई दे रही है।
बड़े ब्रांडेड शोरूम से लेकर स्थानीय सुनारों की दुकानों तक ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि लोगों में यह भ्रम फैल गया है कि सोने की खरीद पूरी तरह बंद कर दी गई है।
स्थानीय कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
सर्राफा बाजार में आई मंदी का सबसे अधिक असर स्थानीय कारीगरों पर पड़ा है। जौनपुर और पूर्वांचल के हजारों परिवार सोने-चांदी के आभूषण निर्माण और नक्काशी के काम से जुड़े हुए हैं।
व्यापारियों के अनुसार नए ऑर्डर लगभग बंद हो चुके हैं। दिहाड़ी पर काम करने वाले कारीगरों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। कई कारीगरों के पास काम नहीं बचा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, राशन और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
व्यापारियों ने सरकार की मंशा का किया समर्थन
स्थानीय सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि वे देशहित में सरकार की आर्थिक सोच का सम्मान करते हैं। व्यापारियों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक दबाव को देखते हुए सरकार का उद्देश्य देशहित में हो सकता है।
हालांकि कारोबारियों ने यह भी कहा कि ग्राहकों में फैले भ्रम को दूर करने के लिए सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि बाजार सामान्य स्थिति में लौट सके।
पुराने सोने के एक्सचेंज को बढ़ावा देने की मांग
जौनपुर के व्यापारियों ने समाधान के रूप में ‘पुराने सोने के एक्सचेंज’ को बढ़ावा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ग्राहक पुराने आभूषणों को रीसायकल कर नए डिजाइन बनवाते हैं, तो नए सोने के आयात की आवश्यकता कम होगी।
व्यापारियों के अनुसार इससे विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी और स्थानीय बाजार भी चलता रहेगा। साथ ही कारीगरों को रोजगार मिलता रहेगा।
व्यापारियों ने रखी अपनी बात
विवेक सेठ ‘मोनू’, गहना कोठी
विवेक सेठ ने कहा कि व्यापारी देशहित में सरकार का सहयोग करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि पुराने सोने के बदले नए आभूषण बनवाने पर कोई रोक नहीं है।
नन्हे लाल वर्मा, कीर्ति कुंज ग्रुप
उन्होंने बताया कि ग्राहकों की संख्या आधी से भी कम हो गई है। लोग पुराने आभूषण बदलने से भी हिचक रहे हैं।
विमल सेठ, विश्वनाथ प्रसाद सेठ छंगनलाल
विमल सेठ ने कहा कि ग्राहकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि पुराने सोने का एक्सचेंज भी प्रभावित हुआ, तो बाजार पूरी तरह ठप पड़ सकता है।
विनोद कुमार, तनिष्क ज्वेलर्स, जौनपुर
उन्होंने कहा कि ब्रांडेड शोरूमों में भी फुटफॉल में भारी गिरावट आई है। यदि पुराने सोने के एक्सचेंज को बढ़ावा मिले तो बाजार में तरलता बनी रह सकती है।
मनोज अग्रहरि, कल्याण ज्वेलर्स, जौनपुर
मनोज अग्रहरि ने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवारों ने शादी-ब्याह की खरीदारी तक टालनी शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
संदीप वर्मा, कनिष्क ज्वेलर्स
उन्होंने कहा कि इस मंदी की सबसे बड़ी मार कारीगरों पर पड़ रही है। शोरूम मालिक कुछ समय तक स्थिति संभाल सकते हैं, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो सकता है।
बाजार में बढ़ी चिंता, समाधान की तलाश
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि यदि ग्राहकों में फैला भ्रम जल्द दूर नहीं किया गया, तो बाजार की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि देशहित और रोजगार दोनों को संतुलित रखने के लिए स्पष्ट जानकारी जारी की जाए। उनका मानना है कि पुराने सोने के एक्सचेंज को बढ़ावा देकर विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ लाखों कारीगरों और व्यापारियों की आजीविका भी सुरक्षित रखी जा सकती है।



