Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img
Homeअपना जौनपुरहर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन, बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधा...

हर्षोल्लास से मनाया गया रक्षाबंधन, बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षासूत्र

जौनपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को जनपद में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक घर-घर में त्योहार की धूम रही। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंटकर सदैव उनकी रक्षा और सुख-दु:ख में साथ निभाने का संकल्प लिया।

रक्षाबंधन को लेकर सुबह से ही घरों में तैयारियां शुरू हो गई थीं। स्नान और पूजा-अर्चना के बाद बहनों ने भाइयों को तिलक लगाया और मिष्ठान खिलाकर राखी बांधी। राखी बांधने के बाद भाइयों ने बहनों को उपहार दिए। घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने का सिलसिला भी चलता रहा। अधिकांश घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए गए और परिवार के सदस्यों ने मिलकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।

बाजारों में रही रौनक, राखी और मिठाइयों की हुई खरीदारी

शहर सहित ग्रामीण बाजारों में भी रक्षाबंधन को लेकर खास रौनक देखने को मिली। प्रमुख तिराहों और चौराहों पर रंग-बिरंगी राखियों तथा मिठाइयों की दुकानें सजी रहीं। दुकानों पर सुबह से ही खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ रही। दिनभर बाजारों और आसपास के क्षेत्रों में रक्षाबंधन से जुड़े गीत सुनाई देते रहे।

त्योहार को लेकर बच्चों में विशेष उत्साह रहा। भाई-बहन सुबह से ही राखी बांधने और उपहार पाने को लेकर उत्साहित नजर आए। बच्चों ने अपनी पसंद की राखियां चुनीं और त्योहार पर मिलने वाले उपहारों का भी बेसब्री से इंतजार किया। कई परिवारों में बच्चों के लिए मनपसंद पकवान बनाए गए तथा घूमने-फिरने की भी योजनाएं बनीं।

शुभ मुहूर्त का रखा गया विशेष ध्यान

रक्षाबंधन की तिथि को लेकर भद्रा के कारण लोगों ने शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है। इसके चलते लोगों ने शुभ मुहूर्त में ही भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा।

हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि द्वापर युग में द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। हालांकि समय के साथ इस पर्व का स्वरूप व्यापक हुआ और यह आपसी स्नेह, विश्वास तथा रक्षा के संकल्प का प्रतीक बन गया है।