जौनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने जनगणना 2027 में ओबीसी के लिए अलग विकल्प दिए जाने की मांग की है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने एडीएम को पत्र सौंपकर जनगणना प्रश्नावली में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग विकल्प नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई।
जातिवार जनसंख्या गणना को बताया महत्वपूर्ण
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि जातिवार जनसंख्या की गणना समावेशी नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। संगठन के अनुसार, जनगणना के पहले और दूसरे चरण की प्रश्नावली में ओबीसी के लिए अलग विकल्प देने के बजाय जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए ‘ओपन कॉलम’ व्यवस्था रखी गई है।
मोर्चा ने इस व्यवस्था को भ्रामक बताते हुए इसमें बदलाव की मांग की है।
2011 की प्रक्रिया का दिया हवाला
संगठन ने वर्ष 2011 की प्रक्रिया का हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय ओपन कॉलम व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में अलग-अलग जातियों की पहचान हुई थी और आंकड़ों को जारी नहीं किया गया।
मोर्चा का कहना है कि यदि जनगणना 2027 में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई तो ओबीसी समेत अन्य जातियों के वास्तविक आंकड़ों के संकलन में कठिनाई हो सकती है।
मानकीकृत पद्धति अपनाने की मांग
मोर्चा ने मांग की कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह ओबीसी एवं अन्य जातियों की गणना के लिए भी सटीक और मानकीकृत पद्धति अपनाई जाए।
इसके लिए राज्यवार आधिकारिक मास्टर जाति निर्देशिका तैयार करने और प्रत्येक जाति को विशिष्ट कोड देने की मांग की गई है। संगठन ने ओपन कॉलम की जगह विकल्प आधारित प्रणाली लागू करने की भी मांग की।
सत्यापन और आंकड़ों की पारदर्शिता पर जोर
मोर्चा ने असूचीबद्ध और स्थानीय जातियों के सत्यापन के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने की मांग की। इसके अलावा जाति संबंधी आंकड़ों के संग्रह, सत्यापन और संकलन की प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और ऑडिट योग्य बनाने की मांग भी की गई।
आगे आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने कहा कि मांगों को लेकर आगे आंदोलन किया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि मांगें पूरी कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।


