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मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही लोकतंत्र होगा समावेशी: प्रो. वंदना सिंह

Democratic inclusivity seminar jaunpur: जौनपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम राजा हरपाल सिंह महाविद्यालय, सिंगरामऊ में आयोजित किया गया।

इस सेमिनार का विषय ‘भारत में लोकतांत्रिक समावेशिता के 75 वर्ष’ रखा गया। इसमें बड़ी संख्या में छात्र और शोधार्थी शामिल हुए।

कार्यक्रम का आयोजन

इस कार्यक्रम का आयोजन राजनीति विज्ञान विभाग ने किया। साथ ही, इसे उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रायोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों को समझाना था।

मुख्य अतिथि का संबोधन

मुख्य अतिथि प्रो. वंदना सिंह ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी है। इससे लोकतंत्र मजबूत होता है।

लोकतंत्र और समावेशिता

उन्होंने बताया कि समावेशी लोकतंत्र के लिए नई पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए, युवाओं को जागरूक होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिक वातावरण से विकास संभव है।

विशेषज्ञों की राय

मुख्य वक्ता प्रो. विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने आर्थिक असमानता पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि दुनिया की बड़ी संपत्ति कुछ लोगों के पास है।

हालांकि, यह स्थिति लोकतंत्र के लिए चुनौती है।

अन्य अतिथियों के विचार

प्रो. आर.के. मिश्र ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जरूरी हैं। इसके अलावा, रोजगार के अवसर सभी तक पहुंचने चाहिए।

उन्होंने समावेशी विकास पर जोर दिया।

आयोजन की विशेषताएं

कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश कुमार सिंह ने किया। साथ ही, कई प्राध्यापकों ने अतिथियों का स्वागत किया।

इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

democratic inclusivity seminar jaunpur कार्यक्रम सफल रहा। ऐसे आयोजन समाज को जागरूक बनाने में मदद करते हैं।

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