सलमान खान का शो बिग बॉस तो आपने देखा ही होगा। शो में जब आवाज गूंजती है कि ‘बिग बॉस चाहते हैं कि…’ तो लगता है कि इस दबंग आवाज के पीछे कोई जबरदस्त आदमी होगा। उस आदमी का नाम है विजय विक्रम सिंह। विजय 13 साल से बिग बॉस के नैरेटर हैं और सलमान खान के बाद उनकी आवाज ही इस शो की सबसे बड़ी पहचान है।विजय ने खुद कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज को पूरे देश में पहचान मिलेगी। बचपन से उनका सपना फौजी बनने का था। 18 साल की उम्र तक उन्होंने अपने सपने के लिए जी-जान लगा दी। आर्मी के लिए एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गए। रिजेक्शन से ऐसे टूटे कि 19 की उम्र में शराब पीनी शुरू कर दी। अगले 5 साल में 7 बार और रिजेक्ट हुए तो खुद को शराब में डुबो दिया। नशे की लत ने ऐसा जकड़ा कि 24-25 की उम्र तक आते-आते दिन की शुरुआत ही शराब से होने लगी। शराब इतनी शरीर पर भारी पड़ी और लिवर जवाब दे गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 10% है। हॉस्पिटल में वो 35 दिन रहे, लेकिन इस दौरान ही उन्हें जिंदगी को नए ढंग से जीने का मकसद मिल गया। इसके बाद विजय ने सरकारी नौकरी की, फिर मुंबई आए और यहां शुरू हुआ बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की स्टोरी, उन्हीं की जुबानी…सलमान खान का शो बिग बॉस तो आपने देखा ही होगा। शो में जब आवाज गूंजती है कि ‘बिग बॉस चाहते हैं कि…’ तो लगता है कि इस दबंग आवाज के पीछे कोई जबरदस्त आदमी होगा। उस आदमी का नाम है विजय विक्रम सिंह। विजय 13 साल से बिग बॉस के नैरेटर हैं और सलमान खान के बाद उनकी आवाज ही इस शो की सबसे बड़ी पहचान है।विजय ने खुद कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज को पूरे देश में पहचान मिलेगी। बचपन से उनका सपना फौजी बनने का था। 18 साल की उम्र तक उन्होंने अपने सपने के लिए जी-जान लगा दी। आर्मी के लिए एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गए। रिजेक्शन से ऐसे टूटे कि 19 की उम्र में शराब पीनी शुरू कर दी। अगले 5 साल में 7 बार और रिजेक्ट हुए तो खुद को शराब में डुबो दिया। नशे की लत ने ऐसा जकड़ा कि 24-25 की उम्र तक आते-आते दिन की शुरुआत ही शराब से होने लगी।इतनी शराब शरीर पर भारी पड़ी और लिवर जवाब दे गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 10% है। हॉस्पिटल में वो 35 दिन रहे, लेकिन इस दौरान ही उन्हें जिंदगी को नए ढंग से जीने का मकसद मिल गया। इसके बाद विजय ने सरकारी नौकरी की, फिर मुंबई आए और यहां शुरू हुआ बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की स्टोरी, उन्हीं की जुबानी…सलमान खान का शो बिग बॉस तो आपने देखा ही होगा। शो में जब आवाज गूंजती है कि ‘बिग बॉस चाहते हैं कि…’ तो लगता है कि इस दबंग आवाज के पीछे कोई जबरदस्त आदमी होगा। उस आदमी का नाम है विजय विक्रम सिंह। विजय 13 साल से बिग बॉस के नैरेटर हैं और सलमान खान के बाद उनकी आवाज ही इस शो की सबसे बड़ी पहचान है।विजय ने खुद कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज को पूरे देश में पहचान मिलेगी। बचपन से उनका सपना फौजी बनने का था। 18 साल की उम्र तक उन्होंने अपने सपने के लिए जी-जान लगा दी। आर्मी के लिए एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गए। रिजेक्शन से ऐसे टूटे कि 19 की उम्र में शराब पीनी शुरू कर दी। अगले 5 साल में 7 बार और रिजेक्ट हुए तो खुद को शराब में डुबो दिया। नशे की लत ने ऐसा जकड़ा कि 24-25 की उम्र तक आते-आते दिन की शुरुआत ही शराब से होने लगी।इतनी शराब शरीर पर भारी पड़ी और लिवर जवाब दे गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 10% है। हॉस्पिटल में वो 35 दिन रहे, लेकिन इस दौरान ही उन्हें जिंदगी को नए ढंग से जीने का मकसद मिल गया। इसके बाद विजय ने सरकारी नौकरी की, फिर मुंबई आए और यहां शुरू हुआ बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की स्टोरी, उन्हीं की जुबानी…सलमान खान का शो बिग बॉस तो आपने देखा ही होगा। शो में जब आवाज गूंजती है कि ‘बिग बॉस चाहते हैं कि…’ तो लगता है कि इस दबंग आवाज के पीछे कोई जबरदस्त आदमी होगा। उस आदमी का नाम है विजय विक्रम सिंह। विजय 13 साल से बिग बॉस के नैरेटर हैं और सलमान खान के बाद उनकी आवाज ही इस शो की सबसे बड़ी पहचान है।विजय ने खुद कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज को पूरे देश में पहचान मिलेगी। बचपन से उनका सपना फौजी बनने का था। 18 साल की उम्र तक उन्होंने अपने सपने के लिए जी-जान लगा दी। आर्मी के लिए एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गए। रिजेक्शन से ऐसे टूटे कि 19 की उम्र में शराब पीनी शुरू कर दी। अगले 5 साल में 7 बार और रिजेक्ट हुए तो खुद को शराब में डुबो दिया। नशे की लत ने ऐसा जकड़ा कि 24-25 की उम्र तक आते-आते दिन की शुरुआत ही शराब से होने लगी।इतनी शराब शरीर पर भारी पड़ी और लिवर जवाब दे गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 10% है। हॉस्पिटल में वो 35 दिन रहे, लेकिन इस दौरान ही उन्हें जिंदगी को नए ढंग से जीने का मकसद मिल गया। इसके बाद विजय ने सरकारी नौकरी की, फिर मुंबई आए और यहां शुरू हुआ बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की 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बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की स्टोरी, उन्हीं की जुबानी…सलमान खान का शो बिग बॉस तो आपने देखा ही होगा। शो में जब आवाज गूंजती है कि ‘बिग बॉस चाहते हैं कि…’ तो लगता है कि इस दबंग आवाज के पीछे कोई जबरदस्त आदमी होगा। उस आदमी का नाम है विजय विक्रम सिंह। विजय 13 साल से बिग बॉस के नैरेटर हैं और सलमान खान के बाद उनकी आवाज ही इस शो की सबसे बड़ी पहचान है।विजय ने खुद कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज को पूरे देश में पहचान मिलेगी। बचपन से उनका सपना फौजी बनने का था। 18 साल की उम्र तक उन्होंने अपने सपने के लिए जी-जान लगा दी। आर्मी के लिए एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गए। रिजेक्शन से ऐसे टूटे कि 19 की उम्र में शराब पीनी शुरू कर दी। अगले 5 साल में 7 बार और रिजेक्ट हुए तो खुद को शराब में डुबो दिया। नशे की लत ने ऐसा जकड़ा कि 24-25 की उम्र तक आते-आते दिन की शुरुआत ही शराब से होने लगी।इतनी शराब शरीर पर भारी पड़ी और लिवर जवाब दे गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 10% है। हॉस्पिटल में वो 35 दिन रहे, लेकिन इस दौरान ही उन्हें जिंदगी को नए ढंग से जीने का मकसद मिल गया। इसके बाद विजय ने सरकारी नौकरी की, फिर मुंबई आए और यहां शुरू हुआ बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की स्टोरी, उन्हीं की जुबानी…सलमान खान का शो बिग बॉस तो आपने देखा ही होगा। शो में जब आवाज गूंजती है कि ‘बिग बॉस चाहते हैं कि…’ तो लगता है कि इस दबंग आवाज के पीछे कोई जबरदस्त आदमी होगा। उस आदमी का नाम है विजय विक्रम सिंह। विजय 13 साल से बिग बॉस के नैरेटर हैं और सलमान खान के बाद उनकी आवाज ही इस शो की सबसे बड़ी पहचान है।विजय ने खुद कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज को पूरे देश में पहचान मिलेगी। बचपन से उनका सपना फौजी बनने का था। 18 साल की उम्र तक उन्होंने अपने सपने के लिए जी-जान लगा दी। आर्मी के लिए एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गए। रिजेक्शन से ऐसे टूटे कि 19 की उम्र में शराब पीनी शुरू कर दी। अगले 5 साल में 7 बार और रिजेक्ट हुए तो खुद को शराब में डुबो दिया। नशे की लत ने ऐसा जकड़ा कि 24-25 की उम्र तक आते-आते दिन की शुरुआत ही शराब से होने लगी।इतनी शराब शरीर पर भारी पड़ी और लिवर जवाब दे गया। डॉक्टर ने कहा कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 10% है। हॉस्पिटल में वो 35 दिन रहे, लेकिन इस दौरान ही उन्हें जिंदगी को नए ढंग से जीने का मकसद मिल गया। इसके बाद विजय ने सरकारी नौकरी की, फिर मुंबई आए और यहां शुरू हुआ बिग बॉस नैरेटर बनने का सिलसिला। 2018 में उन्होंने एक्टिंग करियर भी शुरू किया। उन्होंने फैमिली मैन, स्पेशल ऑप्स 1.5 और फर्जी जैसी वेब सीरीज में अपनी एक्टिंग का कमाल दिखाया है।अब पूरा देश विजय विक्रम सिंह को उनकी आवाज से ही जानता है..आज उन्हीं के स्ट्रगल की स्टोरी, उन्हीं की जुबानी…मिडिल क्लास परिवार में हुआ जन्म, तंगी में बीता बचपन मेरा जन्म 26 नवंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था। जब मैं पैदा हुआ तो घर की माली हालत ठीक थी, लेकिन कुछ समय बाद पापा का बिजनेस डूब गया। इस वजह से हमें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे अच्छी बात ये रही है कि इन तमाम मुश्किलों के बाद भी पापा ने हमारी पढ़ाई पर बंद नहीं होने दी, जिस वजह से हम लोग अपनी पढ़ाई पूरी कर पाए।बचपन से ही सपना था फौजी बनने का मेरे परिवार में कुल 6 लोग थे, जिनका गुजारा दादा जी की पेंशन से होता था जो कि 1600 रुपए थी। बचपन से ही मेरा सपना फौजी बनने का था और दादा जी ने इसके लिए बहुत प्रोत्साहित किया था। वो मुझे ब्रिगेडियर विजय विक्रम सिंह नाम से ही बुलाते थे। मेरी परवरिश में भी दादा जी का बहुत योगदान है। मुझे साहित्य की समझ है, तो इसका श्रेय उन्हीं को जाता है।आर्मी से 8 बार रिजेक्ट हुए, बचपन का सपना टूटा बढ़ती उम्र के साथ ही मेरा प्यार भी आर्मी के लिए बढ़ता रहा। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने SSB (सर्विस सिलेक्शन बोर्ड) का एग्जाम दिया, लेकिन रिजेक्ट हो गया। जो सपना मैंने लगभग 14 साल से देखा था, वो चंद मिनटों में ही खत्म हो गया। रिजेक्शन की वजह से टूटा नहीं बिखर गया था….इस रिजेक्शन को बर्दाश्त करने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि इससे मैं टूटा नहीं बल्कि बिखर गया था। इस बिखराव का ही नतीजा था कि 19 साल की उम्र में मैं शराब पीने लगा। इसके बाद मैं अगले 5 सालों में 7 बार और रिजेक्ट हुआ।सुबह से रात तक नशे में ही रहने लगा हर रिजेक्शन मुझे पहले से और ज्यादा तोड़ देता था। शराब पीने की लत उस लेवल पर पहुंच गई थी, जहां पर इंसान को वो अंदर से खत्म कर देती है। मेरे दिन की शुरुआत शराब पीने से होती थी और रात उसी से खत्म होती थी।इसी दौरान मैंने CAT क्वालिफाई किया, फिर BHU (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, बनारस) में MBA भी करने लगा। इतना सब कुछ करने के बाद भी इस बात का मलाल था कि मैं फौज में नहीं जा पाया। इस दौरान मेरे साथ जो अच्छा हो रहा था, उस पर भी मैं ध्यान नहीं दे पा रहा था क्योंकि हर समय मैं नशे में ही रहता था।घरवाले भी मेरी इस हालत की वजह से बहुत परेशान रहते थे। वो मेरी दिक्कतों को समझते थे और कोशिश करते थे कि शराब की लत छूट जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। एक वक्त ऐसा आ गया था कि वो लोग कहते थे कि मैं घर में शराब पी लूं, लेकिन बाहर जाकर ना पियूं।डाॅक्टर ने कहा था- जिंदा रहने की उम्मीद सिर्फ 10% इन 6 सालों में मैंने इतनी शराब पी कि 26 साल की उम्र में मुझे पेट से जुड़ी एक गंभीर बीमारी हो गई। MBA करने के बाद मेरी एक प्राइवेट कंपनी में जाॅब लग गई थी, जिस वजह से मैं मध्य प्रदेश के सतना में जाकर रहने लगा था। एक दिन मैं सुबह उठा तो मेरे पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था, जिसके बाद परिवार वाले मुझे हॉस्पिटल ले गए। जांच के बाद डॉक्टरों ने मुझे लखनऊ के PGI रेफर कर दिया।जब वहां के डाॅक्टर ने मुझे देखा तो उन्होंने मेरी मां से कहा कि इसे एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस हो गया है, बचने की कोई उम्मीद नहीं। सिर्फ 10% ही उम्मीद है कि आपका बेटा बच जाए। कहिए तो इलाज करें, वैसे भी ये सिर्फ पैसे की बर्बादी है। डाॅक्टर की इस बात पर मां ने कहा- आप अपना काम करिए, जो हमारा काम है, वो हम करेंगे। इस समय मेरे परिवार की माली हालत बहुत खराब थी, फिर भी घरवालों ने इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती। इस बीच मुझे निमोनिया भी हुआ, जिससे मैं मरते-मरते बचा। मेरा पैंक्रियाज फट गया था। लिवर, किडनी ने काम करना बंद कर दिया। फेफड़ों में 60 प्रतिशत पानी भर गया था।मैं 35 दिनों तक PGI में एडमिट था। इस दौरान मैंने बहुत कुछ सहा, परिवार की दुर्गति देखी जिसकी वजह से मेरी सोच पूरी तरह से बदल गई।कुछ समय बाद मेरी कोलकाता में सरकारी नौकरी लग गई थी। मैं MSTC नाम की एक कंपनी में इम्पोर्ट फाइनेंस का काम देखता था। जिसके बाद मेरा ट्रांसफर हुआ और मैं मुंबई आ गया। मुंबई में मैं पाली हिल में रहता था। एक दिन पार्टी में गया था जहां मेरी मुलाकात दोस्त की फीमेल फ्रेंड से हुई। उन्होंने कहा- आपकी आवाज बहुत अच्छी है।फिर उन्होंने कहा- जरूरी नहीं कि आप सिर्फ गाना ही गाएं। आवाज अच्छी है, तो आप बहुत कुछ कर सकते हैं।इसके बाद मुझे अपनी नई क्वालिटी के बारे में मालूम चला। इसके पहले मुझे खुद की आवाज से इतना प्यार कभी नहीं हुआ था, न ही इस बात का एहसास था कि मेरी आवाज इतनी अच्छी है।इसी दौरान मेरी शादी होने वाली थी। एक दिन बातचीत के दौरान मैंने अपनी मंगेतर को बताया कि मेरा सपना है वाॅयस आर्टिस्ट बनने का और फ्यूचर में, मैं इस पर काम जरूर करूंगा। इस पर उन्होंने कहा कि आगे जाकर क्यों। अभी कोई खास जिम्मेदारियां भी नहीं हैं, तो मुझे अभी रिस्क लेना चाहिए।पेरेंट्स के बाद एक मेरी वाइफ ही रही, जिन्होंने मेरे क्रिएटिव काम को समझा और हर कदम पर मेरा हौसला अफजाई करती रहीं।उनकी इस बात ने बहुत हौसला दिया। जिसके बाद 2 साल तक मैंने अपनी आवाज पर काम किया। मैंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और FM में काम करने लगा। सरकारी नौकरी छोड़ने की वजह ये थी कि ये दोनों काम मैं एक साथ नहीं कर सकता था।FM में काम करने के पीछे भी प्लानिंग थी। यहां पर भी काम करने का मकसद ये था कि मुझे जानना था कि मीडिया में काम कैसे होता है। ये मेरी लाइफ का सबसे कठिन और सही कदम था। यहां पर काम करने के दौरान मैंने इस इंडस्ट्री के लोगों से काॅन्टैक्ट्स बनाए।इसके बाद मुझे डांस इंडिया डांस में आशीष गोवारिकर की मदद से काम मिला। इसके बाद कई लोगों से पहचान हो गई। जब मैं लोगों से मिलता था, उन्हें अपनी CD देता था, जिसमें मेरे काम के सैंपल रहते थे।एक दिन मेरे पास बिग बॉस बनाने वाली मीडिया कंपनी एंडेमाॅल से काॅल आया। उन्होंने मुझसे कहा- बिग बॉस में वाॅयस नैरेटर की जरूरत है, अगर आप ये काम करना चाहते हैं, तो अपनी रिकॉर्डिंग की एक CD हमारे ऑफिस भिजवा दीजिए। इसके बाद मेरे पास 2 महीने बाद ऑडिशन के लिए फोन आया। मैंने ऑडिशन दिया और इसके अगले दिन वहां से मुझे काम करने का ऑफर मिला। 2 अक्टूबर 2010 को मैं बिग बॉस में काम करने के लिए लोनावला रवाना हो गया।जब परिवार वालों और दोस्तों को ये बात पता चली कि मैं बिग बाॅस में काम करने वाला हूं, तो वो बहुत खुश हुए। सबसे मजेदार बात ये है कि फिर वो लोग ये कहते थे- अब तो तुम्हारा मिलना-जुलना होता होगा सलमान खान से, एक बार हमारी भी मुलाकात करवा दो। जब मैं बिग बास में पहली बार गया, तब एक व्यक्ति से रिक्वेस्ट करके सलमान खान से मिला था। खास बात ये है कि उस दिन मेरा बर्थडे था। उन्होंने मुझे बर्थडे विश किया, फिर मैंने उनके साथ फोटो क्लिक करवाई। 13 साल की बिग बाॅस की जर्नी में बमुश्किल 5 बार ही मेरा उनसे मिलना हुआ।उनसे मिलने का किस्सा ये है कि एक बार मैं एक बच्ची को उनसे मिलवाने ले गया था। जब वो मिले तो उन्होंने इंतजार कराने के लिए माफी मांगी। वो बच्ची नेशनल लेवल की बैडमिंटन प्लेयर थी। उन्होंने कहा कि अगर उसे ट्रेनिंग की जरूरत हो तो बताना, मैं मदद जरूर करूंगा। सलमान खान का साॅफ्ट वाला साइड कम लोगों ने ही देखा है, उनमें से एक मैं हूं।बिग बाॅस के सेट पर लगभग 6 घंटे काम करता हूं। शाम से लेकर जब तक एपिसोड का लाइव टेलिकास्ट चलता है, तब तक वहां पर मैं मौजूद होता हूं। खास तौर पर मेरा काम स्क्रिप्ट के आधार पर ही होता है और उसमें जानकारी अधिक होती है, जैसे समय बताना, टास्क क्या है, फिर उसे कंटेस्टेंट को समझाना। कभी-कभी सिचुएशन के हिसाब से मुझे चीजें बोलनी पड़ती हैं, लेकिन स्क्रिप्ट मेन बेस होता है।बिग बॉस में काम करने के बाद मुझे दूसरी जगहों से भी काम के ऑफर आने लगे। मैंने वॉयस नैरेटर के तौर पर लगभग 5 साल तक काम किया। एक दिन किसी ने सुझाव दिया कि मुझे थिएटर करना चाहिए। वहां पर काम करने पर आवाज और निखर जाती है। इसके बाद मैंने थिएटर ग्रुप जॉइन किया।मेरी किस्मत यहां पर भी अच्छी थी। एक ग्रुप नए लोगों के साथ नाटक Alexander Vs Chanakya करने जा रहा था। इस नाटक में मुझे चाणक्य का रोल मिला था। इसके हमने पूरे मुंबई में 26 शोज किए थे।एक दिन मेरी मुलाकात कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा से हुई। उन्होंने मुझे अपने ऑफिस बुलाया। उन दिनों वो फिल्म दिल बेचारा की शूटिंग में बिजी थे। जब मैं ऑफिस पहुंचा, तो उन्होंने मुझसे कहा- फिल्म में संजना सांघी लीड एक्ट्रेस हैं और फिल्म में उनकी आवाज को हम बेहतर दिखाना चाहते हैं, तो आप उन्हें ट्रेंड कर दीजिए।इसी बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि मैं एक एक्टर भी हूं। फिर उन्होंने कहा- आप एक एक्टर हैं, ऑडिशन देने कभी नहीं आए।इसके बाद मुझे वेब सीरीज फैमिली मैन में काम करने के लिए ऑडिशन का काॅल आया। इसके अगले दिन मेरे पास कॉल भी आ गया कि मुझे सीरीज में कास्ट कर लिया गया है। यहां से एक्टिंग की जर्नी शुरू हो गई।
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शराब शरीर पर भारी पड़ी और 26 की उम्र में लिवर खराब


