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Homeअपना जौनपुरवरासत मामले में लेखपाल पर गलत रिपोर्ट मामले में अभी तक नहीं...

वरासत मामले में लेखपाल पर गलत रिपोर्ट मामले में अभी तक नहीं हुई कार्यवाही

जौनपुर। सदर तहसील क्षेत्र के एक वरासत प्रकरण को लेकर शिकायत सामने आई है। प्रेमराजपुर उर्फ वि.मं. निवासी निखिलेश बिंद ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि ग्राम खालिसपुर के लेखपाल ने जानबूझकर गलत और विवादित रिपोर्ट लगाकर उनके वरासत के मामले को रोक दिया है।

प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि निखिलेश बिंद ने अपने पिता कन्हई बिंद के निधन के बाद उनकी भूमि पर उत्तराधिकार दर्ज कराने के लिए वरासत का ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के साथ वंशावली, मृत्यु प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक राजस्व अभिलेख भी लेखपाल को उपलब्ध करा दिए गए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि भूमि को लेकर परिवार या किसी अन्य व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है, इसके बावजूद लेखपाल द्वारा मामले को विवादित दर्शा दिया गया। शासन के 29 अक्टूबर 2018 के आदेश के अनुसार यदि वरासत के मामले में कोई विवाद न हो और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो राजस्व विभाग को नियमानुसार नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। लेकिन आरोप है कि लेखपाल ने नियमों की अनदेखी करते हुए गलत रिपोर्ट लगा दी, जिससे वरासत की प्रक्रिया लंबित हो गई और आवेदक को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पीड़ित ने इस मामले में जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी जिलाधिकारी से शिकायत की है, लेकिन शिकायत दर्ज होने के 16 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे साफ प्रतीत होता है कि कुछ जिम्मेदार कर्मचारी ही सरकार की पारदर्शिता और जनसुनवाई व्यवस्था की नीतियों को प्रभावी होने से रोक रहे हैं। जिलाधिकारी को मामले की निष्पक्ष जांच किसी अन्य राजस्व अधिकारी से कराने के साथ ही नियमानुसार वरासत की प्रक्रिया पूरी कराई जानी चाहिए, साथ ही दोषी कर्मचारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग की गई है, ताकि आम लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

फर्जी वरासत कर 74 लाख का गबन, लेखपाल निलंबित

  • राजस्व निरीक्षक पर भी कार्रवाई की संस्तुति

देवरिया। सलेमपुर तहसील क्षेत्र के पड़री गजराज गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद फर्जी वरासत कर करीब 74 लाख रुपये सरकारी धन के गबन का मामला सामने आया है। जांच में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को निलंबित कर दिया गया है, जबकि राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देश पर एसडीएम दिशा श्रीवास्तव की जांच में खुलासा हुआ कि करीब 30वर्ष पहले मृत फेकू पुत्र सुखन की भूमि को उनकी कथित पत्नी बताकर माया देवी के नाम फर्जी तरीके से वरासत दर्ज करा दी गई। बाद में इसी जमीन का एक हिस्सा पंचायत भवन निर्माण के लिए करीब 66.67 लाख रुपये में बैनामा कर दिया गया, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भी मुआवजा मिला। इस तरह माया देवी को कुल 74.03 लाख रुपये प्राप्त हुए। जांच में यह भी सामने आया कि इस रकम में से लाखों रुपये ग्राम प्रधान के पति और अन्य लोगों के खातों में स्थानांतरित किए गए। डीएम ने मामले में एफआईआर दर्ज कर सरकारी धन की वसूली और संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।