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Homeअपना जौनपुरबाल्यकाल में मौतें रोकने के लिए मास्टर ट्रेनरों को मिला प्रशिक्षण

बाल्यकाल में मौतें रोकने के लिए मास्टर ट्रेनरों को मिला प्रशिक्षण

  • बीमारियों तथा कुपोषण से बचाव के लिए एमओ, एचईओ तथा स्वयंसेवी संस्थाओं को दी जानकारी
  • छह माह तक बच्चों को सिर्फ स्तनपान कराना सुनिश्चित कराएंगी आशा कार्यकत्रियां

जौनपुर धारा, जौनपुर। बाल्यकाल (0 से 15 माह) में होने वाली मौतों, बीमारियों तथा कुपोषण से बचाव कर शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास सुनिश्चित कराने के लिए जिला पुरुष चिकित्सालय सभागार में मास्टर ट्रेनरों का सोमवार से पांच दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है। इसमें मेडिकल आफिसर (एमओ), स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (एचईओ) तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को इस संबंध में जानकारी दी जा रही है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहाकि होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड कार्यक्रम के तहत बाल्यकाल में होने वाली मौतों, बीमारियों और कुपोषण से बचाव कर बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण व्यवहारों को बढ़ावा देना होगा। इसके लिए आशा कार्यकत्रियों को बच्चों के तीन, छह, नौ, 12 एवं 15 महीने का होने पर अतिरिक्त गृह भ्रमण करना होगा। इनके माध्यम से बाल मृत्यु एवं बीमारियों को कम करने, पोषण संबंधी स्थिति में सुधार लाने, सही वृद्धि एवं आरम्भिक बाल विकास शुरू करने की कोशिश करनी होगी। एसीएमओ डॉ. एससी वर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकत्री एचबीवाईसी का प्रशिक्षण लेकर शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अतिरिक्त गृह भ्रमण करेंगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग प्रति शिशु की दर से 250 रुपए का उन्हें भुगतान करेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सत्यव्रत त्रिपाठी ने कहाकि एचबीवाईसी कार्यक्रम के तहत गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकत्री बच्चों के माता-पिता को परामर्श देकर 6 माह तक शिशुओं को सिर्फ स्तनपान कराना सुनिश्चित करेंगी। छह माह पर तथा उसके बाद पर्याप्त एवं उपयुक्त पूरक आहार देने, बच्चों में पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान एवं प्रबंधन के लिए माता-पिता को परामर्श देंगी। मातृ एवं बाल संरक्षण कार्ड की सहायता से बच्चों में विलम्बित विकास एवं वृद्धि की पहचान करेंगी। बीमार एवं कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों, अस्पतालों, पोषण केंद्रों में संदर्भित करेंगी। बीमार बच्चों के स्वास्थ्य केंद्र से घर वापस आने पर निरंतर फालोअप लेंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों का शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने वâहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर यह जिला स्तरीय प्रशिक्षक ब्लाक स्तर पर आशा कार्यकत्रियों को पांच दिन का प्रशिक्षण देंगे। पांचवें दिन ब्लाक की सभी आंगनबाड़ियों को पोषण संबंधी गतिविधियों के लिए भी प्रशिक्षित करेंगे। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठकों में स्वास्थ्य विभाग एवं सहयोगी संस्था संयुक्त राष्ट्र बाल आपातकोष (यूनीसेफ) के प्रतिनिधि कार्यक्रम की सफलता के लिए समय-समय पर अनुश्रवण एवं मूल्यांकन करेंगे। जिला स्तरीय प्रशिक्षण में छह डाक्टरों, 11 स्वास्थ्य शिक्षाधिकारियों तथा आठ स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। पहले दिन यूनीसेफ के मंडलीय प्रतिनिधि आलोक राय ने प्रथम दिन प्रतिभाग किया। संचालन जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक मोहम्मद खुबैब रजा ने किया।