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Homeअंतर्राष्ट्रीयपूर्ण बहुमत न होने के कारण नेपाल में नहीं बन सकी सरकार

पूर्ण बहुमत न होने के कारण नेपाल में नहीं बन सकी सरकार

नेपाल में हुए आम चुनाव के जो नतीजे आए हैं, उसके बाद से नई सरकार का गठन नहीं हो पा रहा है. दरअसल, चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में वहां की कार्यवाहक सरकार में चार राजनीतिक दलों के नेता एक समझौते पर आने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं. हालांकि उसके लिए भी ज्‍यादा समय नहीं बचा, क्योंकि नई सरकार बनाने की समय सीमा आज समाप्त होने वाली है.

एबीपी संवाददाता के मुताबिक, नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता को खत्म करने के लिए शीर्ष पार्टियों ने नई सरकार के गठन की जो कवायद शुरू की थी, वो बेनतीजा रही है. शनिवार शाम तक माना जा रहा था कि शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस और प्रचंड की अगुवाई वाली CPN-माओवादी केंद्र के बीच सत्ता बंटवारे पर जारी विमर्श आखिरी दौर में है, लेकिन आज भी शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोई अधिकारिक ऐलान या दावा नहीं किया गया है. खबर है कि बालूवाटार में प्रधानमंत्री के आवास पर चर्चा चल रही है कि कौन पहले सरकार का नेतृत्व करेगा, इस मुद्दे पर जमी बर्फ को तोड़ने और एक समझौते पर मुहर लगाने के लिए, बातचीत को अंतिम रूप दिए जाने की उम्‍मीद है. पीएम सचिवालय की ओर से बताया गया है कि गठबंधन की बैठक से पहले नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल-प्रचंड के साथ बैठक कर रहे हैं. हालांकि, शुक्रवार से आयोजित कई दौर की बैठकें नेताओं को एक समझौते पर लाने में विफल रही हैं. बालुवाटार पहुंचने से पहले शीर्ष माओवादी नेता ने खुमालतार स्थित अपने आवास पर अपनी पार्टी के नेताओं से चर्चा की. इस बीच, प्रचंड के साथ बैठक के लिए जाने से पहले देउबा ने पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के साथ कई दौर की चर्चा भी की. दोनों नेताओं के बीच प्रधानमंत्री पद को लेकर दावा ठोंके जाने की चर्चा है. इस बीच, नेपाली कांग्रेस नेतृत्व पर यह दबाव है कि प्रधानमंत्री का पद माओवादियों के लिए नहीं छोड़ा जाए. बैठक में शामिल एक नेता ने कहा कि प्रमुख दल-नेपाल कांग्रेस और माओवादी केंद्र-प्रधानमंत्री पद पर अपने-अपने पदों को लेकर अड़े रहे, इसलिए पार्टियां सरकार गठन पर आम सहमति नहीं बना सकीं. नेपाल कांग्रेस के नेता ज्ञानेंद्र कार्की ने कहा, “हम आज एक फैसले पर पहुंचेंगे. उन्होंने कहा, गठबंधन के सहयोगी सरकार बनाएंगे. उधर, माओवादी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड जोर दे रहे हैं कि सरकार का नेतृत्व उन्हें करने दिया जाना चाहिए, जबकि नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार का नेतृत्व करने की जिद कर रही है.

सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री बन पाएगा या नहीं?

नेपाली मीडिया से खबरें आ रही हैं राजधानी काठमांडू में राजनीतिक नाटक जोरों पर चल रहा है क्योंकि राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा पार्टियों को 7 दिनों के भीतर प्रधानमंत्री के लिए नाम की सिफारिश करने की समय सीमा आज शाम 5 बजे समाप्त हो रही है. राष्ट्रपति भंडारी ने पार्टियों से संविधान के अनुच्छेद 76(2) के तहत सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर सहमति बनाने को कहा है. चुनाव आयोग द्वारा प्रतिनिधि सभा चुनाव का अंतिम परिणाम दिए जाने के बाद भंडारी ने दलों को सरकार गठन के लिए बुलाया. 

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