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आर्थिक सुरक्षा और घरेलू आजीविका के बीच संतुलन की आवश्यकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद सीमित करने की अपील ने देश में आर्थिक सुरक्षा और घरेलू आजीविका के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। यह संपादकीय सर्राफा बाजार, विदेशी मुद्रा भंडार, गोल्ड रीसाइक्लिंग मॉडल और लाखों कारीगरों के रोजगार पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
Homeअपना जौनपुरपराली जलाना दण्डनीय अपराध, लग सकता है 15हजार तक जुर्माना

पराली जलाना दण्डनीय अपराध, लग सकता है 15हजार तक जुर्माना

जौनपुर। प्रमोशन आफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फार इंनसीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेसिड्यू योजनान्तर्गत मंगलवार को कृषि विभाग द्वारा बीआरपी इण्टर कालेज परिसर में जनपद स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन गोष्ठी/मेला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को खेतों में पराली न जलाने का सुझाव दिया गया।

गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.आरके सिंह ने कहा कि किसान खेतों में पराली कदापि न जलाए, बल्कि बायो डी कम्पोजर से खाद बनाने एवं उन्नति शील कृषि यंत्रों से पराली प्रबंधन का सुझाव दिया तथा बताया कि सैटेलाइट से पकड़ें जाने पर दो एकड़ तक के कृषको पर रुपये 2500,पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये तथा पाच एकड़ क्षेत्रफल से अधिक पराली जलाने पर रुपये 15हजार जुर्माना के साथ सारी सरकारी योजनाओं से बंचित कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि खेतों में पराली जलाने पर मनुष्य एवं जीव जन्तुओ के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, पराली को यथा स्थान मिट्टी में सड़ाने से मृदा का तापमान नियंत्रित रहता है, पीएच मान एवं मृदा की संरचना में सुधार होता है। मृदा की जल धारण क्षमता एवं वायु संचार बढ़ता है जिससे उत्पादन लागत में कमी एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ.सुरेश कुमार कन्नौजिया ने कम लागत में अधिक उत्पादन वाली प्राकृतिक खेती की जानकारी दिया। उन्होंने बताया कि खेतों में 1 टन पराली जलाने से 60किग्रा कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460किग्रा कार्बनडाइऑक्साइड, 200 किग्रा राख एवं 2किग्रा सल्फर ऑक्साईड उत्पन्न होती है। जिससे मृदा संरचना खराब होती है तथा 1टन पराली खेतों में सड़ाने से 5.50किग्रा नाइट्रोजन 2.5किग्रा फास्फोरस, 23किग्रा पोटाश और 400किग्रा जैविक कार्बन प्राप्त होते हैं, जिससे मृदा की उर्वरता में सुधार होता है, पर्यावरण का संरक्षण होता है, मृदा का तापमान नियंत्रित रहता फलस्वरूप उत्पादन बढ़ता है। अध्यक्षता उप कृषि निदेशक हिमांशु पांडेय तथा संचालन उप परियोजना निदेशक आत्मा डा. रमेश चन्द्र यादव ने किया गया। इस मौके पर जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.ओपी श्रीवास्तव, जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी कमलजीत सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक कुमार, विद्यासागर यादव, विकास विश्वकर्मा, अशोक कुमार, महीप, रामशंकर, जुनेद अहमद, सन्ध्या सिंह, युगल तिवारी आदि किसान मौजूद रहें।

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