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पोस्टर में सानिया मौर्य, काव्य लेखन में हिमांशी अव्वल

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में सानिया मौर्य और काव्य लेखन में हिमांशी श्रीवास्तव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
Homeअपना जौनपुरनिजीकरण के विरोध में विद्युत नियामक आयोग पर मूक प्रदर्शन

निजीकरण के विरोध में विद्युत नियामक आयोग पर मूक प्रदर्शन

  • डॉक्यूमेंट को नामंजूर करने की उठी मांग

जौनपुर। सोमवार को बिजली कर्मचारियों ने विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय पर मूक प्रदर्शन किया और निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिया। प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर भी निजीकरण के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए। इसी क्रम में सायं 04बजे सैकड़ो की संख्या में बिजली कर्मचारी विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। बिजली कर्मियों ने विद्युत नियामक आयोग के मुख्य द्वार के सामने निजीकरण के विरोध में  तख्तियां लेकर मूक प्रदर्शन किया। नियामक आयोग के सचिव ने मुख्य द्वार पर आकर संघर्ष समिति का ज्ञापन लिया। ज्ञापन के जरिए संघर्ष समिति ने निजीकरण पर नियामक आयोग द्वारा सुनवाई पर अपनी आपत्ति और  विरोध दर्ज किया। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष के नाम दिए गए ज्ञापन में मांग की है कि वह पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु दिए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दें और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए। ज्ञापन में कहा गया है कि विद्युत नियामक आयोग को अवैध ढंग से नियुक्त किए गए, झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाडा स्वीकार कर लेने वाले ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर पॉवर कॉरपोरेशन से कोई बात नहीं करनी चाहिए थी और न ही इस पर कोई अभिमत देना चाहिए। उन्होने कहा कि 06अक्टूबर 2020 के समझौते पर अरविंद कुमार के हस्ताक्षर हैं जिसमें पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की बात है और साफ लिखा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण के किसी भी डॉक्यूमेंट पर न ही कोई अभिमत देना चाहिए और न ही को कोई मंजूरी नहीं देनी चाहिए। पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा नियामक आयोग के सामने निजीकरण के दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के समाचार से प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फैल गया है।