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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeअंतर्राष्ट्रीयताइवान और चीन के बीच गरमाता दिख रहा माहौल

ताइवान और चीन के बीच गरमाता दिख रहा माहौल

China-Taiwan Conflict: एक तरफ रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है. इसी बीच ताइवान और चीन के बीच माहौल गरमाता दिख रहा है. दोनों देश एक दूसरे को धमकी दे रहे हैं. चीन जहां आक्रमक रुख अपनाये हुए है वहीं ताइवान जवाबी हमला करने की चेतावनी दे रहा है. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ताइवान के रक्षा मंत्री ने बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है. 

दरअसल, ताइवान के रक्षा मंत्री चियू कूओ चेंग ने कहा कि चीन की सेना ताइवानी इलाकों में ‘अचानक घुसपैठ’ कर सकती है, जिससे हमें सतर्क रहने की ज्यादा जरुरत है. गौरतलब है कि ताइवान जलडमरूमध्‍य में तनाव बढ़ा हुआ है. ऐसे में ताइवानी रक्षा मंत्री ने यह बयान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. बता दें कि ताइवान इस समय अमेरिका के साथ बड़े पैमाने पर हथियार खरीद रहा है जिससे चीन बुरी तरह से भड़का हुआ है. संसद में अपने भाषण के दौरान ताइवानी रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन की सेना ताइवान के क्षेत्रीय हवाई और समुद्री इलाके में घुसने का बहाना ढूंढ सकती है. हमें अलर्ट मोड पर रहने की जरुरत है. इसके साथ ही उन्होंने चीन को चेतवानी देते हुए कहा कि घुसपैठ की किसी प्रकार की कोशिश पर हम जवाबी कार्रवाई करेंगे. ताइवानी रक्षा मंत्री का मानना है कि चीनी सैनिक ताइवान में अचानक प्रवेश कर सकती है और इसके क्षेत्र में पहुंच सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अगर मैं इस साल ये बयान दे रहा हूं तो इसका मतलब ये है कि वे लोग घुसपैठ की तैयारी कर रहे हैं. ताइवान के रक्षा मंत्री के बयान पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता माओ निंग ने कहा कि हम अपनी संप्रभुता की रक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए जोरदार कदम उठाएंगे. बता दें कि ताइवान इससे पहले भी कई बार कह चुका है कि  वह अपने आत्‍मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करेगा और अगर चीन की सेनाएं उसके इलाके में घुसीं तो वह जवाबी हमला करेगा. गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में अमेरिकी संसद में निचले सदन की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने ताइवान की यात्रा की थी. उनकी इस यात्रा के बाद से ताइवान और चीन के बीच तनाव बढ़ता चला गया.