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मछलीशहर प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान

मछलीशहर के राजमहल पैलेस में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में विभिन्न विद्यालयों के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को समझते हुए निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
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कूड़े के ढेर ने छीनी शहर की सूरत, शाही किले की रंगत हुई बदरंग

धरोहर के द्वार पर गंदगी का पहरा, सड़कों पर सड़ते कूड़े ने छीना शहर का सुकून, प्रशासन मौन

जौनपुर। ‘शिराज-ए-हिंद’ के नाम से विख्यात ऐतिहासिक जौनपुर शहर इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता की मार झेल रहा है। नगर पालिका की घोर लापरवाही ने न केवल शहर की सफाई व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरों और रिहायशी इलाकों को भी कूड़े के डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया है। विशेष रूप से चक प्यार अली और किला रोड की स्थिति अब आम जनता के बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है। जौनपुर का शाही किला केवल एक पुरातत्व धरोहर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।

लेकिन विडंबना यह है कि किला रोड पर लगा कूड़े का विशाल अंबार इस बेशकीमती इमारत की खूबसूरती को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जब इस भव्य विरासत के दीदार को पहुँचते हैं, तो उन्हें किले की वास्तुकला देखने से पहले मुख्य मार्ग पर फैले सड़ते कचरे, कीचड़ और भिनभिनाती मक्खियों के बीच से गुजरना पड़ता है। यह गंदगी न केवल पुरातत्व विभाग के दावों की पोल खोल रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जौनपुर की छवि को भी धूमिल कर रही है। नगर के चक प्यार अली मोहल्ले की तस्वीर तो और भी डरावनी है। यहाँ कूड़ा डंप करने के लिए किसी उचित व्यवस्था के अभाव में मुख्य रास्ते के बीचों-बीच ही कचरा फेंका जा रहा है। सड़ते हुए कचरे से उठने वाली असहनीय दुर्गंध ने राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संकट केवल गंदगी तक सीमित नहीं है, इसी कूड़े के ढेर पर दिन-रात छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। ये लावारिस जानवर खाने की तलाश में कूड़े को सड़कों पर बिखेर देते हैं और आए दिन राहगीरों व वाहन चालकों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से चोटिल कर रहे हैं। मोहल्ले में संक्रामक बीमारियों और इन हिंसक पशुओं के आतंक ने बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना दूभर कर दिया है।