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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeअपना जौनपुरउदयगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ छठ महापर्व

उदयगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ छठ महापर्व

  • पुत्र-पति के लंबी उम्र की व परिवार की सुख समृद्धि की कामना

जौनपुर धारा, मुंगराबादशाहपुर। नगर के झालियावां तालाब घाट पर घंटो इंतजार बाद सोमवार सुबह व्रती महिलाओं के उदयगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ छठ महापर्व। श्रद्धालुओं में आयोजन समिति द्वारा प्रसाद का वितरण किया गया और सुरक्षा व्यवस्था में प्रशासन मौजूद रहा। बताते चलें कि प्रतापगढ़ रोड स्थित झालियावा तालाब घाट पर नवयुवक डाला छठ पूजा समिति द्वारा लोक आस्था का महापर्व सूर्य देव की आराधना सूर्य षष्ठी (छठ) सोमवार को हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। व्रती महिलाओं ने उदयगामी सूर्य का अर्घ्य देकर पुत्रों और परिवार के लंबी उम्र की कामना की। अर्घ्य देने के बाद तालाब में दीप जलाकर प्रवाहित किया। रात तीन बजे से ही नगर से लेकर ग्रामीण इलाके के श्रद्धालु सिर पर पूजा सामग्री लेकर तालाब की ओर चल पड़े। तड़के सुबह से ही धीरे-धीरे व्रती महिलाएं परिवार के साथ एकत्रित होने लगी। पूजन वेदी के समक्ष विविध तरह के फलों, सब्जियों को अर्पित कर परिवार की सुख, समृद्धि की प्रार्थना की गई। पूजन करते-करते जब सूर्यदेव उदयगामी की ओर अग्रसर होने लगे तब तालाब की धारा में कमर तक डूबकर सूर्यदेव और उनकी बहन छठी माता को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई। उन्होंने संतान के स्वस्थ दीर्घायु जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए परिवार की खुशहाली के लिए भगवान सूर्य से प्रार्थना कर षष्ठी देवी की विधिपूर्वक पूजा की। भगवान सूर्य के उदय होते ही उन्हें अर्घ्य देने का सिलसिला शुरू हुआ। व्रती महिलाएं फल और प्रसाद से भरा दउरा-सूप लेकर भगवान भास्कर की उपासना करती दिखीं। अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत ठेकुआ, फल आदि ग्रहण कर महापर्व छठ का समापन हुआ। नगर पालिका व प्रशासन और आयोजन समिति ने घाट पर साफ-सफाई, सजावट सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये थे। इस दौरान छठ के लोकगीतों से झालियावा तालाब घाट परिसर गूंज उठा। अर्घ्य देने के बाद महिलाएं ठेकुआ का प्रसाद ग्रहण करके निर्जला व्रत का पारणा किया। अर्घ्य वâे बाद कुछ महिलाएं भास्कर भगवान की आरती में शामिल हुई। व्रती महिलाओं ने बताया की छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा का प्रचलन और उन्हें अर्घ्य देने का विधान है।