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Homeअपना जौनपुरआने वाले समय में उर्जा का नया श्रोत बनेगा हाइड्रोजन : डॉ.टी.पी.यादव

आने वाले समय में उर्जा का नया श्रोत बनेगा हाइड्रोजन : डॉ.टी.पी.यादव

जौनपुर धारा, जौनपुर। वीरबहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के रज्जू भैया संस्थान के नैनो साइंस केद्र में हाइड्रोजन गैस उर्जा के संचय विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ.ठाकुर प्रसाद यादव ने कहा कि हाइड्रोजन उर्जा का नया श्रोत हो सकता है। हाइड्रोजन पर्याप्त मात्रा में पर्यावरण में उपलब्ध है और इससे उत्पन्न उर्जा कार्बन उतसर्जन रहित होता है। इस वजह से हाइड्रोजन उर्जा के प्रयोग को लेकर तमाम शोध हो रहे है। इस हाइड्रोजन उर्जा के ईधन के रूप में प्रयोग को लेकर देश-विदेश में बहुत से शोध चल रहे है। इस क्रम में इलहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ.ठाकुर प्रसाद यादव ने अपने व्याख्यान में यह बताया कि हाइड्रोजन गैस उर्जा का एक स्वाच माध्यम है और यह धरती पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है लेकिन इसको संचित करना बहुत ही जटिल प्रक्रिया है। इस उर्जा का प्रचुर मात्र में सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके कई व्यवहारिक कारण है, जैसे हाइड्रोजन उर्जा का संचय एवं संचित हाइड्रोजन गैस का अवाश्कतानुसार उपलब्ध न हो पाना है। भौतिक विज्ञान विभाग के युवा वैज्ञानिक डॉ.ठाकुर प्रसाद यादव ने भारत के हाइड्रोजन मैन के नाम से विख्यात पदमश्री प्रो.ओएन श्रीवास्तव के निर्देशन में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अपना शोध कार्य किया है और वह स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी टॉप दो प्रतिशत वैज्ञानिको की सूची में शामिल है। डॉ.यादव भौतिकी के नैनो पदार्थ, हाइड्रोजन संभरण और ऊर्जा भंडारण पर किए गए शोध कार्य के कारण सुर्खियों में रहे हैं। उनके 150 से अधिक शोध पत्र और 20 पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.वंदना सिंह की प्रेरणा से विद्यार्थियों में शोध के प्रति आकर्षण विकसित करने के लिए ऐसे आयोजन किये जा रहे है। रज्जू भैया संस्थान के निदेशक डॉ.प्रमोद कुमार यादव ने स्वागत तथा नैनो विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डा सुजीत कुमार चौरसिया ने धन्यबाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर प्रो.गिरिधर मिश्र, प्रो.मिथिलेश सिंह, डॉ.काजल कुमार डे, डॉ.धीरेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ.नीरज अवस्थी, डॉ.अजित सिंह, डॉ.नितेश जयसवाल, डॉ.रामंशु, डॉ.संदीप वर्मा सहित शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहें।