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जौनपुर में जन्माष्टमी का उत्सव, मंदिरों से पुलिस लाइन और जिला जेल तक विशेष आयोजन

जौनपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिलेभर में उत्साह रहा। मंदिरों, पुलिस लाइन और जिला जेल में विशेष आयोजन हुए, जबकि बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ी।
Homeअपना जौनपुरअब जौनपुर में भी जगेगी देहदान की अलख

अब जौनपुर में भी जगेगी देहदान की अलख

  • 22साल से चल रहे ‘युग दधीचि अभियानÓ से मेडिकल कॉलेज को मिलेगी नई राह
  • सेंगर दंपति का समर्पण-नि:संतान रहकर जीवन देहदान सेवा को समर्पित

जौनपुर। प्रदेश में 22वर्षों से चल रहा युग दधीचि देहदान अभियान अब जौनपुर में भी अपनी अलख जगाने को तैयार है। इसी क्रम में उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में मंगलवार को देहदान पत्रकार वार्ता एवं जागरूकता सेमिनार आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आरबी.कमल ने की।

मुख्यअतिथि के रूप में कानपुर से आए अभियान प्रमुख मनोज सेंगर और महासचिव माधवी सेंगर ने बताया कि वर्ष 2003 में एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ यह अभियान अब तक 308देह (एम्स रायबरेली और एम्स गोरखपुर सहित) विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों को उपलब्ध करा चुका है, जबकि 4,000 से अधिक लोगों ने देहदान संकल्प पत्र भरे हैं।कार्यक्रम में मौजूद पूर्व प्राचार्या डॉ.रुचिरा सेठी, एनाटॉमी विभाग से डॉ.अर्चना चौधरी, डॉ.प्रियंका सिंह, डॉ.विनोद कुमार सिंह, डॉ.उमेश सरोज, तथा कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.ए.ए.जाफरी ने सेंगर दंपति के योगदान को ऐतिहासिक करार दिया। प्राचार्य ने कहा कि सेंगर दंपति ने दवा व्यवसाय त्यागकर आजीवन नि:संतान रहने का संकल्प लेते हुए पूरा जीवन देहदान अभियान को समर्पित कर दिया। अग्निदाह जैसी परंपरा के बीच यह परिवर्तन आसान नहीं था, लेकिन उनके 22वर्षों के अथक प्रयासों ने असंभव को संभव कर दिखाया।एनाटॉमी विभाग की प्रमुख डॉ.भारती यादव ने बताया कि 10छात्रों पर एक मृत देह की आदर्श व्यवस्था की जगह, कमी के कारण एक देह पर 25 से अधिक छात्रों को अध्ययन करना पड़ता है। ऐसे में देहदान चिकित्सा शिक्षा का सबसे बड़ा धर्म है। माधवी सेंगर ने कहा कि संकल्प पत्र, हलफनामा, आधार और परिवार की सहमति आवश्यक होती है।

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कौन नहीं कर सकते देहदान

  • एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी रोगी
  • कैंसर या सेप्टिसिमिया से मृत्यु
  • कोविड संक्रमित व्यक्ति
  • शरीर पर बड़े घाव
  • अप्राकृतिक मृत्यु (एक्सीडेंट/आत्महत्या)
  • मृत्यु के 6 घंटे बाद देह स्वीकार नहीं