- भीषण गर्मी में प्याऊ व्यवस्थाओं पर ही फेल साबित हो रही ट्रीपल इंजन
- मनोरंजन कर मेडल ले रही समाजिक संस्थाओं ने भी नहीं किया इन्तेजाम
- बन्दबोतल व पाऊच पानी से राहगीर बुझा रहे है प्यास
जौनपुर धारा,जौनपुर। सुबह से ही सूर्य देव की तपिश शुरू हो जाती है। दोपहर के समय लू के थपेड़े चलने लगते है। इससे पंखा और कूलर का असर नहीं पड़ रहा है। दोपहर के समय शहर के मुख्य बाजार सड़कें सूनी पड़ जाती हैं। ऐसे में नगर पालिका द्वारा भीषण गर्मी में कहीं भी प्याऊ की व्यवस्था नहीं किया गया है। जिससे बाजार में खरीदारी करने आये हर वर्ग के व्यक्तियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों क्षेत्र में दिन में औसतन 43 से 44 डिग्री तापमान नापा जा रहा है। चिलचिलाती धूप से आम लोग परेशान हैं। जिसके कारण जनमानस जरूरी काम से ही बाहर निकलते हैं। रिक्शा, ठेला चालक, सड़क किनारे खोमचा लगाने वाले छोटे दुकानदार तथा मजदूरी करने वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस माह में शादी का सीजन भी चल रहा है। लोग दिन व दोपहर में बच्चों संग अपने-अपने घर जा रहे हैं। चिलचिलाती धूप में भी साग-सब्जी व फल-फूल से लेकर कपड़े, बर्तन आदि खरीदने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल की महती आवश्यकता है।

प्याऊ के अभाव में लोगों को बाजार से पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। पिछले वर्षों में नगर पालिका व अन्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्याऊ की व्यवस्था अप्रैल के महीने से ही शुरू हो जाती थी। लेकिन इस तीसरी इंजन सरकार के साथ विकास का नारा प्याऊ व्यवस्थाओं में ही फेल नजर आ रहा है। नगर पालिका परिषद द्वारा सार्वजनिक जगह व चौक-चौराहों पर प्याऊ की व्यवस्था नहीं की गई है। जिसके कारण लोगों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। समर्थ लोग बोतलबंद पानी से काम चला रहे है।

आटो स्टैण्ड, बस स्टैण्ड पर आम यात्रियों व राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिससे चिलचिलाती धूप में आम राहगीरों को दिक्कत उठानी पढ़ रही है। वैसे तो नगर क्षेत्र में तमाम समाजसेवी संस्थाएं जो बिना समाज सेवा किये ही राष्ट्र स्तर तक के समाजिक कार्यों में उच्च स्थान रहने का मेडल और बड़े-बड़े होटलों में मनोरंजन करते देखें जा रहें है और उससे पता नहीं किस गरीब का भला हो रहा है। यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। भीषण गर्मी से जहां एक ओर नगर के लोग झुलस रहे हैं वहीं दिन में घरों से बाजार निकलने वालों का भी बुरा हाल है।

पर्याप्त सार्वजनिक प्याऊ न होने से लोग मजबूरी में बोतलबंद या फिर पानी पाउच खरीदने को मजबूर हैं। पिछले एक पखवाड़े से नगर का अधिकतम तापमान 42 व उससे अधिक 44 डिग्री तक रिकॉर्ड किया जा रहा है। दोपहर में तपिश के असर से लोगों का बार-बार गला सूख रहा है। राहगीरों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिले, इसके लिए जरूरी है कि नगर में एक निश्चित दूरी पर प्याऊ खोले जाएं। पिछले वर्षों में नगर पालिका द्वारा लाल कपड़ा में लिपटे मटके रखे जाते रहे हैं। लेकिन इस बार नगर पालिका परिषद परिसर खुद ही पानी की तलाश कर रहा है। पालिका परिषद की व्यवस्थाओं पर भी अब सेंध लग चुकी है। नये कार्यों को छोड़ पुरानी प्याऊ के लिये लगी तमाम उपकरणों को ही साफ करा दिया जाये तो लोगों को सड़कों पर पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराने में पालिका को अतिरिक्त पानी की व्यवस्थाओं पर पैसा फूंकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
नपा.परिसर में ही नहीं है प्याऊ की व्यवस्था

नगर पालिका परिषद द्वारा इस बार तो प्याऊ की व्यवस्था कहीं की गई है। वहीं पहले से लगाये गये शुद्ध पीने के पानी की टंकी भी साफ-सफाई के अभाव में बजबजा रही है। पालिका चुनाव से पहले भाजपा के ट्रीपल इंजन की सरकार बनाने के बाद विकास को रफ्तार देने का मामला अब ठण्डे बस्ते में जाता नजर आ रहा है। बताते चलें कि अभी पिछले वर्ष ही 3.35लाख के लागत से कोतवाली चौराहा हनुमान मन्दिर के सामने प्याऊ हेतु टंकी का शिलान्यास राज्यमंत्री गिरीश यादव व निवर्तमान पालिकाध्यक्ष माया टण्डन द्वारा सामुहिक रूप से किया गया था। चुनाव के समय जनता से किया गया शुद्ध एवं स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करने वाला वादा अब महत्वहीन लगने लगा है। कोतवाली चौराहे पर नगर पालिका परिषद द्वारा निर्मित पानी टंकी के अंदर व बाहर व्याप्त गंदगी एवं साफ-सफाई के अभाव में बजबजा रही है। वहाँ पर लोग पानी पीने तो दूर हाथ धोने से भी डरतें है। वहीं नगर क्षेत्र में घर-घर पानी उपलब्ध कराने वाली पालिका परिषद परिसर में ही शुद्ध एवं ठंडे पानी की व्यवस्था कराने में विफल साबित हो रही है। पालिका परिषद में देखने को मिला कि पानी के लिए लगा हैंडपम्प वर्षों से सूखा पड़ा है।



