जौनपुर धारा, जौनपुर। कथावाचक जयप्रकाश महाराज ने श्री राम जानकी मंदिर कमासिन पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण कथा में पांचवे दिन श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहाकि सदा सुख केवल भगवान के चरणों में है। भगवान के सम्मुख और उनके शरणागत होने को ही भागवत कथा है। भागवत कथा से कल्याणकारी और कोई भी साधन नहीं है इसलिए व्यस्त जीवन से समय निकालकर कथा को आवश्यक महत्व देना चाहिए। भागवत कथा से बड़ा कोई सत्य नहीं है। भागवत कथा अमृत है इसके श्रवण करने से मनुष्य अमर हो जाता है। यह एक ऐसी औषधि है जिससे जन्म-मरण का रोग मिट जाता है। भागवत कथा को पांचवां वेद कहा गया है जिसे पढ़ सकते हैं और सुन सकते हैं। कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भेग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। दिव्य भागवत कथा का आयोजन 4 अगस्त से 10 अगस्त तक दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक किया जा रहा है। कथा के आयोजन महंत श्री राम कमल दास ‘ब्रह्मचारी’ महराज द्वारा किया जा रहा है। श्री भागवत की कथा में मंदिर के इर्द-गिर्द गांव से कथा का रसपान करने के लिए भरपूर भीड़ इकट्ठा हो रही। इस आयोजन में गुरुजी के कुछ परम शिष्य विशाल कुमार सिंह, विरेन्द्र बहादुर सिंह, कल्पनाथ पाठक का बहुमूल्य योगदान रहा।
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सदा सुख केवल भगवान के चरणों में : जय प्रकाश

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