जौनपुर धारा, केराकत। क्षेत्र के ग्राम मोलनापुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा एवं तीर्थ प्रसाद के पांचवे दिन मंगलवार को शाम कथा प्रवचन करते हुए कथा वाचक डॉ. मदन मोहन मिश्र ने कहा कि जिसने जीवन में दिया नहीं उसे लेने का अधिकार नहीं। देने की संगत में उदारता होना चाहिये। दरवाजों से याचकों को लौटाने वाला निर्धन हो जाता है, सहयोग की भावना का सन्दर्भ दान है। संस्कार एक अवस्था है एक क्रम है, गरीब कन्या का विवाह करने से परमात्मा की असीम कृपा होती है। कथा केवल सुनने मात्र से मंगल होती है। जब तक सत्संग में बैठे हो तब तक कुसंग से बचे हो, जितनी तेजी से मानवी मूल्य, नैतिकता, संस्कार का पतन हो रहा उसे संस्कार की रोक सकता है। कैंची काटने का कार्य करती है इसलिए दर्जी उसे अपने से दूर रखता है। सुई दो अलग हुए कपड़े को जोड़ने का कार्य करती है इसलिये दर्जी उसे हमेशा सिर पर रखता है। उसी प्रकार समाज में जो जोड़ने का कार्य करे उसे बैठाओ और जो अलग करने का कार्य करे दूर रखना चाहिये। वहीं कथा प्रवचन के दौरान कथा सुनने आये श्रोताओं ने देर रात तक कथा सुनकर अपने अन्तर में सदभाव का संचार किया।
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जौनपुर में जन्माष्टमी का उत्सव, मंदिरों से पुलिस लाइन और जिला जेल तक विशेष आयोजन
जौनपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिलेभर में उत्साह रहा। मंदिरों, पुलिस लाइन और जिला जेल में विशेष आयोजन हुए, जबकि बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ी।
नैतिकता और मानवीय मूल्यों के पतन को संस्कार ही रोक सकता है : डॉ. मदन मोहन मिश्र


