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E-Paper 03-11-2026

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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में पाल समाज का विरोध, सौंपा ज्ञापन

जौनपुर। कौशांबी के सैनी कोतवाली क्षेत्र के लौहदा गांव में 28मई को आठ वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए दुराचार की घटना से लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी सिलसिले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रयागराज जाकर आईजी को ज्ञापन सौंपने जा रहीं समाजसेवी डॉ. सरस्वती पाल को प्रशासन द्वारा नजरबंद कर दिया गया। डॉ.सरस्वती पाल को उनके मुंगराबादशाहपुर स्थित आवास पर चौबीस घंटे के लिए नजरबंद कर दिया गया। बताया जा रहा है कि जौनपुर, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर से बड़ी संख्या में पाल समाज के लोग उनके साथ प्रयागराज जाकर ज्ञापन देने वाले थे। लेकिन प्रशासन ने भारी संख्या में जुट रहे लोगों की सूचना पर यह कदम उठाया। प्रशासनिक रोक के चलते प्रयागराज में ज्ञापन नहीं सौंपा जा सका, लेकिन डॉ.सरस्वती पाल ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुंगराबादशाहपुर थानाध्यक्ष दिलीप कुमार सिंह को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि पीड़ित बच्ची को जल्द से जल्द न्याय मिले और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। ज्ञापन क्षेत्राधिकारी मछलीशहर प्रतिमा वर्मा की अनुपस्थिति में थानाध्यक्ष को सौंपा गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में पाल समाज के लोग मौजूद रहे और उन्होंने प्रशासन के रवैये पर नाराजगी भी जताई। डॉ.सरस्वती पाल ने कहा, हमारा उद्देश्य केवल न्याय की मांग करना था। यह किसी राजनीतिक या उग्र आंदोलन का हिस्सा नहीं था। फिर भी हमें नजरबंद कर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि न्याय की मांग करना कोई अपराध नहीं है, लेकिन सरकार और प्रशासन सांकेतिक विरोध तक को दबाने में जुटा है।