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हत्या के पहले कई राज खोल गया अतीक, ISI और लश्कर से जुड़े थे तार

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार की रात तीन लोगों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी में अतीक अहमद और अशरफ अहमद की मौत के बाद माहौल गर्म है. पुलिस इस घटना की पूरी कड़ियां खोलने में लगी है तो वहीं मारे गये माफिया-राजनेता अतीक अहमद ने पुलिस पूछताछ के दौरान अपराध की दुनिया के कई बड़े राज भी उगले थे. उसने स्वीकार किया था कि उसके पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध थे. एफआईआर में इसकी जानकारी दी गई है.

प्रयागराज के शाहगंज थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में पुलिस ने यह उल्‍लेख किया है कि अदालत के आदेश पर अतीक अहमद का बयान लिया गया. इसमें अतीक ने स्वीकार किया कि उसका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ‘इंटर-सर्विसेस इंटेलिजेंस’ (आईएसआई) और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से है. पुलिस ने अतीक अहमद के बयानों के आधार पर जांच शुरू ही की थी कि शनिवार को उसे और उसके भाई की पुलिस अभिरक्षा में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई. थमिकी में अतीक अहमद के हवाले से दर्ज बयान में कहा गया है, ”पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा ड्रोन के माध्यम से पंजाब प्रांत में हथियार गिराये जाते हैं तथा पंजाब में आईएसआई से जुड़ा व्‍यक्ति उन हथियारों को एकत्र कर कुछ लश्‍कर-ए-तैयबा को भेजता है तथा कुछ हथियार खालिस्तानी अलगाववादी संगठनों को देता है और उन्हीं में से कुछ हथियार जैसे प्‍वाइंट 45 बोर की पिस्तौल, एके 47 राइफल, स्टेनगन और आरडीएक्स मुझे भी उपलब्ध कराता है, जिसका मैं भुगतान भी करता हूं।

दो पुलिसकर्मियों की हत्या में प्रयुक्त हुए आईएसआई के हथियार
अतीक ने पुलिस को बताया, ‘इन संगठनों के लोग मेरे यहां आते-जाते थे और इन लोगों से आपस में की गई बात से ये जानकारी प्राप्त हुई थी कि ये लोग देश में कोई बड़ी वारदात करना चाह रहे हैं.’ उसने पुलिस को यह भी बताया, ‘हथियार उपलब्ध कराने वाले आईएसआई और लश्कर से जुड़े कुछ लोगों का पता उसे और कुछ के बारे में उसके भाई अशरफ को मालूम है.’ अतीक ने बयान में स्वीकार किया कि उन्हीं (लश्कर एवं आईएसआई) से लिये गये हथियार उमेश पाल और उसकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों की इस साल फरवरी में हुई हत्या में इस्तेमाल किया गया था.

​हथियार छिपाने की भी पुलिस को दी थी जानकारी
उसने कहा, ‘प्रयोग में लाये गये तथा हत्या के बाद रखे हुए हथियारों का पता हम दोनों लोग साथ चलकर बता सकते हैं, क्योंकि उन जगहों का कोई मकान नंबर नहीं है, जिसे जेल से बता पाना मुमकिन नहीं है. यदि आप (पुलिस) हम दोनों साथ चलें तो हम लोग उन स्थानों की पहचान कर सकते हैं.’ इस बीच, अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे गिरोह का सफाया करके अपना नाम बनाना चाहते थे. उन्होंने यह भी कहा कि वे अपराध के बाद वह भाग नहीं सके थे, क्योंकि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था.

पत्रकार बनकर आए थे हमलावर
एक आरोपी ने पुलिस ने बताया, ‘जब से हमें अतीक और अशरफ की पुलिस हिरासत के बारे में जानकारी मिली, तब से हम उनकी हत्या करने की योजना बना रहे थे. इसलिए हमने पत्रकारों का वेष धरा और जब हमें सही मौका मिला, तो हमने गोली चला दी और दोनों को मार दिया.’ प्रयागराज में जेल में बंद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को हथकड़ी पहनाई गई थी, जब शनिवार की रात करीब 10 बजे सरेशाम उनकी हत्या कर दी गई.

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