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संस्कार भारती की कार्यशाला में बच्चों ने दिखाया हुनर, समापन समारोह बना आकर्षण का केंद्र

जौनपुर। संस्कार भारती ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का भव्य समापन नगर स्थित होली चाइल्ड एकेडमी में आयोजित समारोह के साथ हुआ। 20 दिनों तक चली इस कार्यशाला में बच्चों को चित्रकला, कथक, लोकगीत, नाट्यकला और समकालीन नृत्य का प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में प्रशिक्षुओं ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया।

संस्कार भारती ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में मिला बहुआयामी प्रशिक्षण

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और नटराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद संस्था के सदस्यों ने ध्येय गीत प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में बच्चों को जलरंग, पोस्टर रंग, एक्रिलिक रंग, स्थिर चित्रांकन तथा कला एवं शिल्प की बारीकियां सिखाई गईं। समापन अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों और शिल्पकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे अभिभावकों और अतिथियों ने सराहा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता दर्शकों का दिल

संस्कार भारती ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षित बच्चों ने लोकगीत, कथक और समकालीन नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने ‘मां की ममता’ और ‘भूत मंडली’ विषयक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।

नाट्यकला प्रशिक्षण के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। वहीं कथक प्रस्तुति में सरस्वती वंदना, तिहाई, तोड़ा और महिषासुर मर्दिनी जैसे आकर्षक अंशों का मंचन किया गया।

बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण हैं ऐसी कार्यशालाएं

मुख्य अतिथि अपर जिलाधिकारी (भू एवं राजस्व) अजय अम्बष्ट ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल पर बीतता है। ऐसे में संस्कार भारती ग्रीष्मकालीन कार्यशाला जैसी पहल बच्चों की रचनात्मक क्षमता, सांस्कृतिक समझ और व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।

प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों को किया गया सम्मानित

समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। पर्यावरण विषय पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए।

इसके अलावा कार्यशाला में योगदान देने वाले प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक वंदे मातरम् गायन और आभार ज्ञापन के साथ हुआ।