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पूरनपुर में अंडरपास निर्माण की मांग पर डीआरएम का निरीक्षण, ग्रामीणों को मिली नई उम्मीद

पूरनपुर गांव के सामने बंद किए गए रेलवे मार्ग पर अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर डीआरएम वाराणसी ने निरीक्षण किया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि स्वीकृति मिलने के बाद वर्षों पुरानी आवागमन समस्या का समाधान होगा।
Homeअपना जौनपुरसाइबर ठगों का गिरोह चढ़ा पुलिस के हत्थे

साइबर ठगों का गिरोह चढ़ा पुलिस के हत्थे

  • लोगों को अपने जाल में फंसा कर खातों से उड़ाते थे पैसे

जौनपुर धारा, जौनपुर। साइबर ठगों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने अब कमर कस ली है। ठगों द्वारा भोली-भाली जनता को फोन करके उनके हजारों, लाखों रुपए ऐंठ लेने की घटनाएं लगातार सामने आने पर प्रशासन सख्त हो गया है। गुरुवार को कार्यवाही करते हुए थाना मड़ियाहूँ व साइबर सेल जौनपुर की सयुंक्त टीम ने 09 शातिर अन्तर प्रान्तीय साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। जिनके कब्जे से 33 पासबुक,12 चेकबुक, 9 वोटर कार्ड, 7 आधार कार्ड, 4 पैन कार्ड, 3 श्रमकार्ड, 08 एटीएम कार्ड व 12600 रूपये नकद तथा सम्बन्धित खातों में 64284 रुपया होल्ड कुल 76884 रुपया बरामद किया गया।

जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र मड़ियाहूँ अन्तर्गत एक शिकायतकर्ता से साइबर ठगो द्वारा फोन कर खाते की निजी जानकारी प्राप्त कर कुल 5 बार में 99020 रुपया खाते से आनलाइन ठगी कर ट्रांसफर कर लिया गया था। जिसमें थाना स्थानीय पर सुंसगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया। घटना के सफल अनावरण हेतु पुलिस अधीक्षक द्वारा दो टीमो को लगाया गया। जिसके क्रम में 16 मई को साइबर सेल के तकनीकी सहयोग से अभियुक्तों की पहचान की गयी। जिनकी लोकेशन जनपद अलीगढ़ में होना पाया गया। जिस पर पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार तत्काल थाना मड़ियाहूँ एवं साइबर सेल टीम को जनपद अलीगढ़ रवाना किया गया। 17 मई को उक्त टीमों द्वारा संयुक्त रुप से कार्यवाही करते हुए कुल 09 अभियुक्तो को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के उपरान्त मु.अ.सं. 120/2023 धारा 420 भा.द.वि. व 66डी आईटी एक्ट थाना मडियाहूँ में प्राप्त अभिलेखो के आधार पर धारा 467,468,471,34, 120बी भा.द.वि. की बढोत्तरी की गयी। जिसमें आवश्यक कार्यवाही के उपरान्त न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में महेश बाबू पुत्र राम सिंह निवासी धौरी थाना अकराबाद जिला जौनपुर, अंशुल कुमार गौतम पुत्र श्याम सिंह निवासी खेडिया रफीमतपुर थाना अतरौली जिला अलीगढ़, विपिन कुमार पुत्र देवेन्द्र कुमार निवासी धौरी थाना अकराबाद जिला अलीगढ़, आशुतोष आनन्द उर्फ सोनू पुत्र अतर सिंह नि. धौरी थाना अकराबाद, जिला अलीगढ़, नितिन कुमार पुत्र साहब सिंह नि. चौधेरा थाना छतारी जिला बुलन्दशहर, अंकित पुत्र गेंदालाल निवासी चौधेरा थाना छतारी जिला बुलन्दशहर, महेश पुत्र सोम सिंह निवासी पिलखुनी थाना अतरौली जिला अलीगढ़, मृदुल पुत्र हरपाल सिंह निवासी उमरारा थाना डिबई जिला बुलन्दशहर, कपिल पुत्र विजयपाल निवासी चौधेरा थाना छतारी जिला बुलन्दशहर शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि प्रयोग में लाये गये मोबाइल नम्बरो व खातों को भिन्न –भिन्न प्रान्तो, जनपदो को उपलब्ध कराते हुए उक्त अभियुक्तो के आपराधिक इतिहास पता लगाया जा रहा है।गिरफ्तारी करने वाली टीम में नि. ओम नरायण सिंह, प्र.नि. थाना मड़ियाहूँ, उ.नि. सन्तराम यादव , उ.नि. शिवभंजन प्रसाद, हे.का. रामबली यादव, हे.का. संजय सिंह, हे.का. अखिलेश यादव, का. पवन यादव, का. संदीप यादव, म.आ. अंकिता थाना मड़ियाहूँ और साइबर एक्सपर्ट मु.आ. ओमप्रकाश जायसवाल, का. संग्राम यादव, का. सत्यम कुमार साइबर सेल शामिल रहे।

  • फर्जी सिम और खातों की डिटेल निकाल कर देते थे घटना को अंजाम

गिरफ्तार साइबर जालसाज मुख्यतः चार टीम बनाकर साइबर अपराध को अन्जाम देते थे। एक टीम अलग-अलग लोगों के खाते खुलवाती है जिनका उपयोग ठगी कर पैसा उन्ही खातों में मँगाया जाता है। इनको प्रत्येक खाता खुलवानें के लिए रूपया 9000 मिलता है जिसमें से ये अपनी आईडी पर खुलवाने वाले व्यक्ति को रूपया 4000 रुपये मिलते हैं। एक टीम द्वारा फर्जी सिम प्रदान किया जाता है जिसमें ये लोग सिम दुसरो के नाम पर एक्टीवेट करके देते थे। कई बार अगर कोई नया सिम लेने आता था तो ये बहाने से कई बार फोटो व अँगुठा लगाकर एक से अधिक सिम एक्टीवेट करके देते हैं जिसका पता सिम लेनें वाले व्यक्ति को भी नहीं होता। सिम प्राप्त करानें वाले व्यक्ति को रूपया 1000 प्रति सिम कार्ड के हिसाब से मिलता है। एक टीम विभिन्न खातों के एटीमएम कार्ड व विभिन्न सिम मुख्य टीम को देते थे जिसके बदले उन्हे खाते के लिये 9000 रुपये प्रति खाते व सिम कार्ड के लिये 1500 रुपये प्रति सिम के हिसाब से मिलता था। इस टीम द्वारा एटीएम का उपयोग कर पैसा भी विभिन्न जगहो से निकाल कर कैश कर लिया जाता था। यह वह टीम है जो कि इस गिरोह का सरगना होती है। इस टीम द्वारा लोगों को फोन काल कर उनको झासे में लेकर खाते की डिटेल प्राप्त कर मोबाइल से ओटीपी आदि प्राप्त कर आम लोगों के खाते से पैसा उडाना एवं उपरोक्त तीन टीमों द्वारा प्राप्त खातों, सिमकार्ड का प्रयोग कर प्रâाड किये गये पैसों को नकदी में बदलना एवं उक्त टीमों को उनके हिस्से का पैसा नकद में प्रदान करना होता था।