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भूख से मुक्ति दिलाकर पीड़ित मानवता की सेवा कर रहा है अनाज बैंक – डीआईजी

  • हाशिये पर रहने वाले परिवारों के लिए अनाज बैंक श्रेष्ठ मॉडल
  • मुसहर परिवार के बच्चों को अब भूख की पीड़ा नहीं सहनी होगी
  • अनाज बैंक ने जारी किया पासबुक, सर्वे कर नट और घुमन्तु जातियों को अनाज बैंक से जोड़ा जाएगा

जौनपुर धारा, जौनपुर। विशाल भारत संस्थान द्वारा संचालित विश्व के पहले अनाज बैंक की जौनपुर शाखा ने भूख की पीड़ा से मुक्ति दिलाने हेतु बड़ा कदम उठाया है। मुसहर, नट एवं घुमन्तु जातियों को अनाज की गारंटी और बच्चों को भूखे पेट न सोने देने के लिए केराकत में अनाज बैंक ने मुसहर परिवार की महिलाओं को पासबुक एवं अनाज वितरण कार्यक्रम एवं ‘अनाज बैंक : हाशिये पर रहने वाले परिवार को परिस्थितिजन्य भूख से मुक्ति हेतु सामजिक प्रयास’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक अखिलेश चौरसिया ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपोज्वलन कर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। अनाज बैंक की प्रबन्ध निदेशक डॉ. अर्चना भारतवंशी ने जब सम्मान से मुसहर परिवार की महिलाओं को पासबुक लेने के लिए आमंत्रित किया तो उनके आंखों से आंसू छलक गए। डीआईजी अखिलेश चौरसिया ने 50 मुसहर महिलाओं को पासबुक देकर भूख से मुक्ति की गारंटी का प्रमाण पत्र दिया। साथ ही उनकी रसोई के लिए आटा, दाल, चावल, तेल, मसाला, नमक वितरित किया। जो मुसहर परिवार कड़ी मशक्कत के बाद भी महीने में 5 दिन फांका करने को मजबूर था अब वह निश्चिंत है कि अनाज बैंक से उसे अधिकार के साथ अनाज मिल जाएगा। बच्चों को भूखे नही सोना पड़ेगा। अनाज बैंक में दो तरह के खाताधारक है प्रथम वो जिनका पेट भरा है, जमा खाताधारक है। 5 किलो अनाज देकर अपना खाता खुलवा सकते है। इनको ब्याज के रूप में 5 से 10 किलो जमा करने पर संतोष, 11 किलो से 20 किलो जमा करने पर दुआ, 21 किलो से 50 किलो जमा करने पर पुण्य, जीवन भर जमा करने पर मोक्ष मिलता है। यह भारतीय संस्कृति का आध्यत्मिक ब्याज है। द्वितीय- निकासी खाताधारक वो हैं जो भूख से पीड़ित हैं। इनको पात्रता के आधार पर प्रति सप्ताह या प्रति माह 5 किलो अनाज दिया जाता है। इसमें मुसहर, नट, बाँसफोर एवं घुमन्तु जातियों के अलावा विधवा, तलाकशुदा, 70 वर्षीय वृद्ध एवं निराश्रित बच्चों को निकासी खाताधारक बनाकर अनाज दिया जाता है। लक्ष्मी बहुत खुश थी अनाज बैंक के पासबुक को पाकर, उसे लगा कि उसे कोई खजाना मिल गया हो। अनाज बैंक के निकासी खाताधारकों को प्रति माह अनाज मिलने की गारंटी रहती है। विशाल भारत संस्थान की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अपना विचार व्यक्त करते हुए डीआईजी अखिलेश चौरसिया ने कहा कि भूख से मुक्ति दिलाना पीड़ित मानवता की सेवा है। अनाज बैंक एक बेहतर मॉडल है जो सामाजिक प्रयासों से चलता है। सामाजिक सहभागिता के आधार पर चलने वाले अनाज बैंक की आवश्यकता हमेशा रहेगी क्योंकि परिस्थितिजन्य भूख का शिकार तो कोई भी कभी भी हो सकता है। अध्यक्षता करते हुए पूर्व विधायक दिनेश चौधरी ने कहा कि आपदाओं और परिस्थितियों से जूझते समाज को भूख की पीड़ा सबसे अधिक होती है। अनाज बैंक के कार्य को अनिवार्य सेवा के रूप में लिया जाना चाहिए। दुनियां को इस मॉडल को अपनाना चाहिए। गैर सरकारी प्रयास से ही बेहतर सेवा की जा सकती है। भूखे को रोटी देने से बड़ी सेवा और क्या हो सकती है। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरूजी ने कहा कि मुसहर, नट, बाँसफोर एवं घुमन्तु जातियों के साथ भूख का संकट है। इन जातियों को भूख से मुक्त करना और संरक्षित करना अनाज बैंक की प्राथमिकता है। पेट भरो आन्दोलन दुनियां के लिए प्रभावशाली आन्दोलन में से एक होगा और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने वाला बनेगा। अनाज बैंक के डिप्टी चेयरमैन ज्ञान प्रकाश ने कहा कि अनाज बैंक उन क्षेत्रों में खोला जाएगा जहां भूख की समस्या है। सड़क पर रहने वाले समुदाय, तलाकशुदा, विधवा, 70 वर्ष के निराश्रित अनाज बैंक के लक्षित समूह में शामिल है। संचालन डॉ. अर्चना भारतवंशी के किया एवं धन्यवाद नौशाद ने दिया। कार्यक्रम में नजमा परवीन, नाजनीन अंसारी, इली भारतवंशी, खुशी भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी, डॉ. धनंजय यादव, महेन्द्र प्रताप सिंह, एहतेशाम अहमद, लियाकत अंसारी, सुभाष यादव, भइया लाल यादव, रमेश कुमार सिंह,  ओबैदुल्लाह शेख, शौकत शेख, अंसार अहमद, अब्दुर्रहमान, मो. अशहद आदि लोगों ने भाग लिया।