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हैप्पी मॉडल स्कूल में मिशन शक्ति जागरूकता कार्यक्रम

मुंगराबादशाहपुर के हैप्पी मॉडल पब्लिक स्कूल में थाना पुलिस ने मिशन शक्ति अभियान के तहत छात्राओं को महिला सुरक्षा, आत्मरक्षा, सरकारी योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। पुलिसकर्मियों ने छात्राओं से छेड़छाड़ या उत्पीड़न की स्थिति में निडर होकर शिकायत करने की अपील की।

E-Paper 10-10-2026

Homeअपना जौनपुरथानेदार का रूतबा रखते हैं कारखास

थानेदार का रूतबा रखते हैं कारखास

जौनपुर धारा (सूरज विश्वकर्मा)

जौनपुर। मुंगराबादशाहपुर थाने में तैनात पुलिस कर्मियों को मनचाही ड्यूटी लगवाने से लेकर अवकाश स्वीकृत कराने में कारखास की अहम भूमिका देखी जा रही है। पुलिस प्रशासन के विभागीय शब्दावली में भले ही कारखास नाम का कोई पद श्रृजित नहीं किया गया है, लेकिन थाने इनके बिना नहीं चलते है। पुलिस विभाग में बिना पद श्रृजन के ही थाने में तैनात होने वाले कारखास माफियाओं से सेटिंग करने में न केवल माहिर होते हैं अपितु थानों में मौखिक रूप से श्रृजित किए गए इस अनोखे पद पर कार्यरत पुलिस कर्मी की भूमिका थाना क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण होती है। आम तौर पर देखा जाता है कि थाना में कारखास का रुतबा थानेदार से कम नहीं होता। लगभग हर थाने में वसूली के लिए किसी न किसी सिपाही को बतौर कारखास रखा जाता है। जो थाने में होने वाली पूरी वसूली का हिसाब रखता हैं। हालात यह हैं कि थानेदार का तबादला होने के बाद आने-वाले नए थानेदार का स्वागत कारखास द्वारा सबसे पहले किया जाता है। बताया जाता है कि थाने के कारखास इतने पावरफुल होते हैं कि इनकी ड्यूटी न तो पहरे पर लगाई जाती है और न ही किसी हल्का क्षेत्र में ही। यहां तक की बैंकों पर भी इनकी ड्यूटी नहीं लगाई जाती है। बताया जाता है कि थाना क्षेत्र में अनैतिक कार्यो से होने वाली अवैध वसूली से लेकर प्राइवेट वाहनों के पड़ाव अड्डो की वसूली का जिम्मा भी इन्हीं के पास होता है। पुलिस विभाग में सबसे मजबूत कड़ी के रूप में शुमार थानों के थानेदार की कृपा से तैनात किए जाने वाले कारखासों की वजह से प्रायः कानून व्यवस्था कटघरे में खड़ी होती रहती है। सूत्रो की मानें तो कारखास होने के लिए थानेदार का अति करीबी होने के साथ ही राजनीतिक एवं माफियाओं में महारत हासिल होने की क्षमता होनी चाहिए। कारण की थानों को व्यवस्थित ढंग से चलाने में इन कारखासों की अहम भूमिका होती है। थानेदार से कब कौन मिल सकता है और किससे कब मिलाना है, इसकी सेटिंग कारखास ही करते हैं। क्षेत्र की अधिकांश घटनाओं को मैनेज करने में कारखास की अहम भूमिका रहती है। जुआ, शराब, जिस्म फरोशी के अड्डों के साथ ही नशा विक्रेताओं, खनन माफियाओं, भू-माफियाओं, तस्करों, अवैध कारोबारियों, दबंगों, दलालों से इनकी साठगांठ तगड़ी रहती है। कारखास से थाने पर तैनात सिपाही, दरोगा भी पंगा लेने की साहस नहीं करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार भले ही इन्हें जनता की सेवा के लिए नियुक्त  किया है, लेकिन यह कारखास केवल धन उगाही का जरिया खोजते हैं बल्कि इनकी जद में आने वाले छोटे-मोटे मामलो में भी बड़ी रकम वसूली जाती है। लोगों का मानना है कि थाने में तैनात कारखास के तिलस्म तोड़े बिना कानून व्यवस्था का राज कायम करना असंभव नहीं तो आसान भी नहीं हो सकता।