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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeअपना जौनपुरआज डूबते सूर्य को अर्घ्य देंने घाटों कुछ पर पहुँचेगें श्रद्धालु

आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देंने घाटों कुछ पर पहुँचेगें श्रद्धालु

जौनपुर धारा, जौनपुर। हिन्दू रिति रिवाज के अनुसार दीपावली त्योहार के 6वें दिन लोक आस्था की छठ पूजा शुरू हो जाती है, जो अगले दिन सूर्य देवता को उगते समय अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त होती है। नगर पालिका अधिशासी अधिकारी पवन कुमार ने विभिन्न घाटों का अवलोकन कर श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया। छठ पूजा बिहार से प्रारम्भ है लेकिन इन दिनों लगभग देशभर में किया जाने लगा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा झारखंड में छठ पूजा का विशेष महत्व है साथ ही दिल्ली, मुंबई समेत कई बड़े शहरों में भी इसका भव्य आयोजन किया जाता है। छठ पूजा का आरम्भ कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से हो जाता है, जिसमें पहला दिन नहाय-खाय होता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा होता है। इस वर्ष छठ पूजा 30 अक्टूबर से प्रारम्भ होकर 31 अक्टूबर को उगते सूरज को अर्घ्य देकर सम्पन्न होगा। परन्तु नहाय-खाय से ही छठ पूजा का आरम्भ हो जाता है। चतुर्थी के दिन ही नहाय-खाय होता है जो शनिवार को था। छठ पूजा का व्रत रखने वाले लोग नहाय-खाय के दिन स्नान आदि के बाद सात्विक भेजन ग्रहण करते है। इसके बाद वे छठी मैया का व्रत रखते है। जो लोग छठ व्रत रखते है, उनके भेजन करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य चतुर्थी के दिन भोजन करते हैं। व्रती को व्रत पूर्ण करने तक भूमि पर ही सोना होता है। रविवार को सभी व्रती महिलायें घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देगीं और फिर अगले दिन सुबह उदीयमान के समय अर्घ्य देकर पारण करेंगी। जिसके पश्चात ही छठ पूजा का समापन होगा। विगत कई वर्षों से नगर के तूतीपुर घाट, गोपीघाट, विसर्जन घाट, हनुमान घाट, बजरंग घाट, गूलरघाट सहित आदि घाटों पर विधि-विधान से पूजा अर्चन कर अर्घ्य दिया जाता है। इसी क्रम में तूतीपुर घाट पर कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू हो गयी हैं। स्थानीय लोगों के सहयोग से नगर पालिका कर्मियों ने घाटों पर साफ-सफाई का कार्य पूर्ण कर लिया है और अधिकारिक निरीक्षण भी जारी है। पहले जौनपुर में हिन्दू धर्म की कुछ महिलाएं ही यह व्रत रखतीं थी लेकिन आज के परिवेश में लगभग समस्त घाटों श्राद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहता है।