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अपार है कालिकन धाम की महिमा, चवन मुनि की धरती पर है स्थापित 

नवरात्रि के पावन पर्व पर माता के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ होती है. दूरदराज से भक्त माता के मंदिरों के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. ऐसा ही एक मंदिर अमेठी में है. जिसका सीधा इतिहास पुराणों और वैदिक मान्यताओं से जुड़ा है. मंदिर में लाखों श्रद्धालु नवरात्रि के 9 दिनों में पहुंचते हैं और भवानी के सामने अपनी अर्जी लगाते हैं. कालिकन धाम के स्वरूप को बदलते हुए मंदिर को आकर्षक और भव्य बनाया गया है और यहां पर दूरदराज से आने वाले भक्त मां भवानी के दरबार में अपनी अर्जी लगाते हैं.

अमेठी के संग्रामपुर विकासखंड के भौसिंहपुर गांव में अमृत कुंड पर मां कालिका धाम का मंदिर विराजमान है. सिद्ध पीठ कालिकन धाम का महत्व प्राचीन है. दूरदराज से यहां पर हजारों की संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं. मंदिर में ही अमृत कुंड विराजमान है. जहां का शीतल जल स्पर्श मात्र से ही बड़े-बड़े दुख और कष्ट दूर कर देता है. इस मंदिर की मान्यता श्रीमद्भागवत महापुराण देवी पुराण और कालिका पुराण जैसे महान ग्रंथों में मिलती है. भक्तों की अलग-अलग मान्यता है कोई भक्त यहां पर मान्यता पूरी होने पर टिकरी चढ़ाता है, तो कोई घंटे बांधकर अपनी आस मां भवानी से लगाता है. दूरदराज से आने वाले भक्तों की अलग-अलग मान्यताएं हैं. अमृत पर विराजमान शक्तिपीठ मां कालिका धाम की महिमा अपरंपार है. कालिकन धाम में अंतर्जनपदीय अंतरराज्यीय के साथ विदेश के लोगों ने यहां पर आकर मां भवानी की पूजा अर्चना की है और अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना की है. मंदिर के पुजारी श्री महाराज बताते हैं कि मां कालिका स्वयंभू हैं. इनकी स्थापना नहीं हुई. संतों मनीषियों और देवताओं की आराधना पर मां भगवती इस अमृत कुंड पर स्वयं प्रकट हुई. यह मंदिर ईसा पूर्व का है. कई पुराणों में मां कालिका धाम का इतिहास दर्ज है.

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