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फुले जयंती पर बोले प्रो. प्रमोद यादव—शिक्षा से ही संभव है सामाजिक परिवर्तन

जौनपुर। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और योगदान को याद किया गया।

शिक्षा और समानता पर फुले के विचारों की चर्चा

कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि महात्मा फुले का जीवन सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा के प्रसार और समानता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि फुले ने वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों को शिक्षा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणा है। उनके अनुसार शिक्षा ही समाज के समग्र विकास और बदलाव की सबसे बड़ी कुंजी है।

महिला शिक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष योगदान

प्रो. यादव ने यह भी कहा कि महात्मा फुले ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर बालिकाओं के लिए विद्यालय स्थापित किया और उस समय की सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल माना जाता है।

सामाजिक भेदभाव खत्म करने का आह्वान

इस अवसर पर जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने छात्रों से अपील की कि वे शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाएं।

उन्होंने समाज में फैले भेदभाव को समाप्त करने और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम में मौजूद रहे कई प्राध्यापक और छात्र

कार्यक्रम में प्रो. मिथिलेश सिंह, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. धीरेंद्र चौधरी, डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. रामांशु प्रभाकर सिंह और डॉ. दीपक मौर्य सहित अनेक प्राध्यापक, अधिकारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

सभी ने महात्मा ज्योतिबा फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।