जौनपुर। 122दिवसीय शाकाहार-सदाचार जनजागरण यात्रा कल सायंकाल ग्राम मनेछा में 114वें पड़ाव पर सत्संग सम्बोधन में संस्थाध्यक्ष पंकज महाराज ने कहा कि प्रेमी भाई-बहनों, यह अमोलक मानव तन है। इसे महात्माओं ने ‘सुर दुर्लभÓभी बताया है। कोई इसे इन्सानी जामा कहता है,तो कोई अशरफुल मखलूकात कहता है तो किसी महात्मा ने इसी को जिन्दा ईश्वर का मन्दिर तथा पलटू दास महाराज ने तो इसे’उल्टा कुँआÓभी संज्ञा दी और कहा ‘उल्टा कुंआ गगन में, तिसमें जरै चिरागÓ यानि इसी मनुष्य मन्दिर में बिना तेल, घी, बाती के एक चिराग भी जलता रहता है। वह ‘छ: ऋतु बारह मास रहै जलतै दिन राती।’ एक अनोखा चिराग यानि प्रभु का अंश विराजमान है। उसी में मधुर-मधुर आवाजें भी आती रहती हैं। वर्णन किया है कि निकसै एक अवाज, सदा जोति की मांही। जीते देवी देवताओं का दर्शन, ब्रह्म, पारब्रह्म का दर्शन तथा साक्षात् उस अनामी महाप्रभु का दर्शन एवं भूत भविष्य का ज्ञान हो जाता है। महाराज ने सुमिरन, ध्यान, भजन की क्रिया को भी विस्तार से समझाया। कहा कि रास्ता सच्चा है करोगे तो अनुभव होगा। उन्होंने आगामी 28से 2दिसम्बर तक मथुरा में जयगुरुदेव आश्रम पर होने वाले पूज्यपाद दादा गुरु महाराज के 77वें पावन भण्डारे पर पधारने का निमन्त्रण भी दिया। समारोह में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा।
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E-Paper 10-06-2026
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114वें दिन भी जारी रहा सत्संग

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