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कार ने डिलीवरी बॉय को मारी टक्कर, ट्रैफिक दरोगा की इंसानियत ने जीता लोगों का दिल

जेसीज चौराहे पर सड़क हादसे में घायल डिलीवरी बॉय को ट्रैफिक दरोगा ने गोद में उठाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया। पुलिस ने आरोपी वाहन और चालक को हिरासत में ले लिया है।

E-paper 09-06-2026

Homeअंतर्राष्ट्रीयराजनीतिक और नैतिक रूप से दिवालिया हो गया : मुस्तफा नवाज खोखर

राजनीतिक और नैतिक रूप से दिवालिया हो गया : मुस्तफा नवाज खोखर

पाकिस्तान के पूर्व सांसद मुस्तफा नवाज खोखर ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान “राजनीतिक और नैतिक रूप से दिवालिया” हो गया है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह खबर सामने आई है. मुस्तफा खोखर ने क्वेटा में नेशनल डायलॉग के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “हम राजनैतिक और नैतिक रूप से दिवालिया हो गए हैं. आज भी लोगों को वह सच नहीं बताया जा रहा है जिसकी देश को जरूरत है. नेशनल डायलॉग सम्मेलन  मुस्तफा नवाज खोखर ने शुरू किया है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान की समस्याओं की पहचान करना और उसक समाधान खोजना है. खोखर के सहयोगी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेता मिफ्ताह इस्माइल भी सम्मेलन में शामिल हुए. 

राजनीतिक दलों के बीच संपर्क टूट गया है

पाकिस्तान के द न्यूज इंटरनेशनल न्यूजपेपर ने बताया कि इस सत्र का आयोजन बलूचिस्तान पीस फोरम ने किया था. वहीं, सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के पूर्व नेता  मुस्तफा नवाज खोखर ने कहा कि पाकिस्तान के लोगों और राजनीतिक दलों के बीच संपर्क टूट गया है. उन्होंने कहा कि पनामा पेपर्स और तोशखाना केस जैसे अप्रासंगिक राजनीतिक विमर्श में उलझे रहने के बजाय हमें लोगों के मुद्दों को पर बात करने की जरूरत है.

लोगों के मुद्दे कहां थे? 

मुस्तफा नवाज खोखर कहा, “पनामा पेपर्स और तोशखाना मामले पर चर्चा हुई, लेकिन लोगों के मुद्दे कहां थे? अब स्थिति उस जगह पहुंच गई है, जहां अगर कोई देश नहीं छोड़ता है, तो वे पहाड़ों पर चले जाएं.” पीपीपी नेता ने कहा, लोकतंत्र तब गर्त में चला गया जब तानाशाह ने देश के संविधान का उल्लंघन किया.

पहले दिन तय हो गया था कि…

मुस्तफा नवाज खोखर ने सम्मेलन में आगे कहा, “पहले दिन तय हो गया था कि देश में लोकतंत्र को फलने-फूलने नहीं दिया जाएगा. हमने देश के संविधान निर्माता के साथ क्या किया?” खोखर ने पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ किए गए व्यवहार पर सवाल उठाते हुए पूछा, जिन्हें तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल जिया-उल-हक ने फांसी दी थी. मुस्तफा खोखर ने कहा, “कोर्ट को मानवाधिकारों की जिम्मेदारी दी गई है, वे भी चुप हैं और मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही हैं. समाज बिखर रहा है.