- सीएमओ ने की सख्त कार्रवाई
बदलापुर। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत में कुछ डॉक्टर और कर्मचारी विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से ऐसा ही एक मामला सामने आया है,जहां डॉक्टरों और उनके एजेंटों की मिलीभगत से मरीजों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल में कुछ डॉ.ओपीडी कक्ष में एजेंटों को बैठाकर इलाज के लिए आने वाले गरीब और असहाय मरीजों को सरकारी दवाएं नहीं देते। बल्कि उन्हें बाहर की दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। मरीजों को एजेंट के साथ डॉक्टरों के निजी मेडिकल स्टोर या उनके परिचित दुकानों पर भेजा जाता है, जिससे दवाओं के नाम पर उनसे अधिक पैसे वसूले जा सकें।
पीड़ित की शिकायत पर खुलासा
राजन कुमार नामक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक लिखित शिकायत पत्र भेजा है और साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी से फोन पर शिकायत की कि उन्होंने अपनी पत्नी का इलाज बदलापुर सीएचसी में कराया, जहां डॉक्टर कोविदेन्द्र त्रिपाठी ने सरकारी दवाएं देने के बजाय उन्हें अपने एजेंट के साथ शारदा हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर भेज दिया। वहां से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया गया।
दुर्घटना पीड़ितों से भी वसूली का आरोप
एक अन्य मामला प्रमोद कुमार शर्मा ने उजागर किया है, जिसमें उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए बताया कि उनके गांव का ई-रिक्शा चालक लालचंद, सवारी ले जाते समय दुर्घटना का शिकार हो गया। घायलों को बदलापुर सीएचसी लाया गया, जहां डॉक्टर अरविंद पांडेय, फार्मासिस्ट सुभाष मौर्या और अमरजीत ने इलाज शुरू करने से पहले मरीजों से मलहम, पट्टी और अन्य दवाइयाँ बाहर से मंगवाई। इतना ही नहीं, घायलों से सात सौ रुपये भी लिए गए, जो सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था के खिलाफ है।
सीएमओ की सख्त कार्रवाई
दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी ने डॉक्टर कोविदेन्द्र त्रिपाठी एवं डॉ गौरव सिंह का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल में चर्चाओं का दौर जारी है।
पहले भी हो चुका है तबादला, फिर भी बदली नहीं कार्यशैली
गौरतलब है कि उक्त दोनों चिकित्सकों का तबादला पहले भी हो चुका है। कुछ माह पूर्व जिलाधिकारी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में डॉक्टर के कक्ष से सिंपल लेकिन ज़रूरी दवाएं मिलने पर कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। इसके बाद दोनों डॉक्टरों का तबादला कर दिया गया था। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि कुछ समय बाद ही दोनों डॉक्टर फिर से बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी तैनाती हासिल करने में सफल हो गए। आमजन में इसे लेकर काफी आक्रोश रहा और सवाल उठे कि आखिर किसके दबाव में ये पुन: तैनात किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था में जड़ जमाए भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अंगद के पांव की तरह जमे इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को लोग सराह रहे हैं, लेकिन यह भी मांग कर रहे हैं कि अब इनके खिलाफ स्थायी और सख्त कदम उठाए जाएं।



