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पाकिस्‍तान में भारत के खिलाफ बोलने वालों और ‘डराने वालों’ की कमी नहीं…

पाकिस्‍तान में भारत के खिलाफ बोलने वालों और भारत के नाम पर ‘डराने वालों’ की कमी नहीं है. वहां इस्लामिक उग्रवादी भारत के नाम पर अपनी रोटियां सेकते हैं. पाकिस्‍तान वो इस्‍लामिक मुल्‍क है, जहां बरसों से आतं‍कवादियों को जिहाद की आड़ में ट्रेनिंग दी गई है और मुस्लिम बहुल दुनिया बनाने के सरेआम भाषण दिए जाते हैं. न केवल भारत, बल्कि वहां ब्रिटेन में भी इस्लामी उग्रवाद की जड़ें जमाने की कोशिश की जा रही है. ब्रिटेन की एक ताजा रिपोर्ट में फिर पाकिस्तान की पोल खुली है.

घरेलू चरमपंथ का मुकाबला करने के लिए ब्रिटेन की ‘रोकथाम’ रणनीति के तहत नई रिपोर्ट आई है, यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है कि इस्लामी चरमपंथ ब्रिटेन के लिए पहला खतरा है और यह पाकिस्तान द्वारा पोषित कश्मीर पर बढ़ते कट्टरवाद की बात करता है. यह रिपोर्ट खालिस्तानियों से “संभावित रूप से जहरीले” खतरे की बात भी करती है. यह रिपोर्ट पाकिस्तान के तर्कों को अधिक व्यापक और अधिक ठोस रूप से उलट देती है. यह रिपोर्ट ब्रिटेन में, खास तौर से कश्मीर पर, भारत विरोधी भावना को भड़काने के लिए पाकिस्तान की बयानबाजी को पहचानती है.

ब्रिटिश चरमपंथी समूहों से हाथ मिला रहे पाकिस्‍तानी 

कमिश्नर फॉर पब्लिक अपॉइंटमेंट्स विलियम शॉक्रॉस के नेतृत्व वाली स्वतंत्र रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटिश चरमपंथी समूहों और एक पाकिस्तानी मौलवी के कश्मीर में हिंसात्‍मक कार्रवाई करने की मंशा है. शॉक्रॉस का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ब्रिटिश चरमपंथी समूहों और एक पाकिस्तानी मौलवी के कश्मीर में हिंसा करने से जुड़े सबूत देखे हैं. यह रिपोर्ट पाकिस्तानी मौलवियों, पाकिस्तानी बयानबाजी और ब्रिटेन और कश्मीर में फैली भारत विरोधी भावना के बीच एक “क्रॉसओवर” की बात करती है. इन सब में एक ही सूत्र चल रहा है, वह है पाकिस्तान. ऐसे में पाकिस्‍तान में भारत के खिलाफ क‍िस कदर जहर भरा हुआ है, यह इस रिपोर्ट से जाहिर होता है.

इस्लामी चरमपंथियों के बारे में आई रिपोर्ट 

शॉक्रॉस इस्लामवादी उग्रवाद द्वारा पैदा खतरे को पहचानने में ब्रिटेन में “कायरता की संस्कृति” की बात करता है. इस रिपोर्ट का प्रकाशन चुप्पी की उस बाधा को तोड़ता है. वहीं, ताजा रिपोर्ट आने के बाद यह खबर भी आई है कि ब्रिटेन सरकार पाक समर्थित इस्‍लामी चरमपंथ से निपटने के लिए कड़े कदम उठाएगी. इसे होम सेक्रेटरी सुएला ब्रेवरमैन ने पूर्ण रूप से स्वीकार किया है. ब्रेवरमैन ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इस्लामी उग्रवाद के खतरे का मुकाबला करने के लिए कड़े कदम उठाने की उसकी सभी सिफारिशों को भी माना है. इस सिफारिश में मुख्य रूप से ब्रिटेन में कट्टरता का मुकाबला करने के लिए उन कदमों को शामिल किया गया है जो उस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

खालिस्तानी चरमपंथियों से भी है खतरा

बता दें कि पाकिस्‍तान की पोल खोलने वाली रिपोर्ट को पूर्व गृह सचिव प्रीति पटेल ने कमीशन किया था. वहीं, अब यह माना जा रहा है कि पाकिस्तानी लॉबी इसे भारत समर्थक प्रोपेगंडा का आह्वान करते हुए कोई अभियान शुरू कर सकती है. हालांकि इससे रिपोर्ट पर फर्क नहीं पड़ेगा, ब्रिटिश भारतीयों को ऐसा लगता है. वहीं, रिपोर्ट में खालिस्तानी चरमपंथियों का भी प्रमुखता से जिक्र है. इस रिपोर्ट में इस पर फोकस किया गया है कि खालिस्तानी समर्थकों द्वारा पैदा हुए “संभावित रूप से जहरीले” खतरे क्या होते हैं. खालिस्तानी समर्थक भारत और ब्रिटिश सिखों के बीच फैल रहे हैं.

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