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Homeअपना जौनपुरनेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर आयोजित हुई जुलूस व जनसभा

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर आयोजित हुई जुलूस व जनसभा

जौनपुर धारा, बदलापुर। छात्र संगठन एआईडीएसओ, युवा संगठन एआईडीवाईओ, किसान संगठन एआईकेकेएमएस तथा किशोर संगठन कॉमसोमोल के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय आजादी आंदोलन की गैर समझौतावादी धारा के महानायक व महान क्रांतिकारी योद्धा नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 127वीं जयंती के अवसर पर 23 जनवरी को बदलापुर सब्जीमण्डी परिसर में जनसभा आयोजित की गई। इसके पहले 11बजे से बदलापुर पुरानी बाजार बाग से इंदिरा चौक होते हुए सब्जीमण्डी तक नेताजी की फोटो व झण्डे बैनर से सुसज्जित जुलूस भी निकाला गया। जनसभा की शुरुआत नेताजी की तस्वीर पर मल्यार्पण करके की गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कॉ.अशोक मिश्र ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के गैर समझौतावादी क्रांतिकारी विचारों की प्रासंगिकता बढ़ती जा रही है। क्योंकि, जन जीवन की असली समस्याओं-महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अशिक्षा, अपसंस्कृति, अपराध से ध्यान हटाने के लिए जाति, धर्म, क्षेत्र व भाषा के आधार पर लोगों की एकता को तोड़कर उन्हें आपस में लड़ाने का काम किया जा रहा है, ताकि देश में बढ़ रहे शोषण-जुल्म व अन्याय-अत्याचार के खिलाफ जनशक्ति के निर्माण को रोका जा सके। देश की इस विकट परिस्थिति में नेताजी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हमें क्या करने को कहती है? नेताजी ने कहा था – ‘बचपन में अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ना ही मैं अपना परम कर्तव्य समझता था, बाद में गंभीरता से सोचने पर मैंने समझा कि अंग्रेजों को भगा देने से ही हमारे कर्तव्यों की इतिश्री नहीं हो जाती। एक नई सामाजिक व्यवस्था कायम करने के लिए हिंदुस्तान में एक और क्रांति की जरूरत है। जनसभा की अध्यक्षता अध्यक्ष मण्डल द्वारा की गई, जिसमें जवाहिरलाल मिश्र, इंदुकुमार शुक्ल व संतोष प्रजापति शामिल रहे। संचालन दिनेशकांत मौर्य ने किया। सभा को रविशंकर मौर्य, मिथिलेश मौर्य, दिलीप कुमार, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, प्रमोद कुमार शुक्ल, विजयप्रकाश गुप्त, राजबहादुर विश्वकर्मा, रामप्यारे व राकेश निषाद ने संबोधित किये। क्रांतिकारी गीत अंजली, अनीता, पूनम, चंदा, वंदना, श्वेता ने पेश किए। इस अवसर पर सैकड़ों छात्र, युवा, किसान, मजदूर, महिलाएं व बुद्धिजीवीगण मौजूद रहे।

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