जौनपुर। लक्ष्मी नारायण इण्टर कालेज के बगल भौरा में अपना तैंतालिसवाँ पड़ाव किया, यहां सत्संग सभा में प्रवचन करते हुये संस्थाध्यक्ष सन्त पंकज ने कहा आप लोगों को उत्तम से उत्तम मानव शरीर मिल गया। इसे देते समय परमात्मा ने कहा था कि जैसा साफ सुथरा मनुष्य शरीर दिया जा रहा इसमें रहकर अपनी आत्मा का कल्याण करा लेना। आप को इस काम को करना चाहिये था। लेकिन जब बड़े हुये तो दुनिया के सामानों को इक्_ा करने व रिश्ते बनाने में लग गये। भजन का वादा भूल गये। आत्मा-परमात्मा के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुये उन्होंने कहा जीवात्मा अजर-अमर देश सतलोक की रहने वाली है। यह वहां से आने वाली आकाशवाणी, शब्द पर उतार कर लाई गई। सबसे पहले इसके कारण शरीर, उसके बाद सूक्ष्म शरीर, इसके बाद सत्तरह तत्वों की लिंग शरीर और चौथी स्थूल शरीर जिसमें हम आप रहते हैं बन्द की गई। लोग यह विचार कर सकते हैं कि जब शरीर यहीं छूट गया तो कैसे इसे यातनायें दी जाती हैं। मृत्यु के बाद इसी शरीर से मिलती लिंग शरीर में जीवों के कर्म भुगतायें जाते हैं। उन्होंने ‘जैसा खाये अन्न, वैसा होवे मन।Ó पंक्ति को उद्धृत करते हुये कहा कि मानव शाकाहारी प्राणी है लेकिन अपनी बद्धि व बल से पशु पक्षियों की हिंसा करता है। इससे मानव में हिंसा की प्रवृृति पैदा होती है। इसलिये शाकाहार को अपनायें, शराब आदि नषीले पदार्थों का त्याग करें। इस अवसर पर ऋशिदेव श्रीवास्तव, बालेन्द्र मिश्र, संजय यादव, डॉ.मनबोध प्रजापति, अरविन्द कुमार सिंह, सहयोगी संगत आजमगढ़ के रामचरन यादव, कमला प्रसाद मौर्य, राम समुझ गुप्ता, नन्दू यादव, जद्दूपाल आदि मौजूद रहे।
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तैतालिसवें दिन भी जारी रहा सत्संग व प्रवचन



