किसी तारे को सुपरनोवा में विस्फोट होते हुए देखना बेहद दुर्लभ होता है. लेकिन शोधकर्ताओं ने 2010 से, हबल स्पेस टेलीस्कॉप के आर्काइव किए गए डेटा में करीब 1100 करोड़ साल पहले फटते हुए तारे की तस्वीर देखी है, जिसके पीछे गैलेक्सी क्लस्टर छिपा हुआ है. यह पहली बार इस तरह की घटना इतनी जल्दी देखी गई है ब्रह्मांड में.
नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध के मुख्य लेखक और मिनेसोटा स्कूल ऑफ फिजिक्स एंड एस्ट्रोनॉमी यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता वेनेली चेन का कहना है कि शुरुआती स्टेज में एक सुपरनोवा का पता लगना बहुत ही दुर्लभ है क्योंकि यह स्टेज बेहद छोटी होती है.

उन्होंने कहा कि यह स्टेज केवल कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक ही रहती है जो किसी की भी आंख से आसानी से मिस हो सकती है. उसी एक्सपोजर में हम तस्वीरों के सीक्वेंस को देख सकते हैं यानी एक सुपरनोवा के कई चेहरे. इस सुपरनोवा का पता ग्रैविटेशनल लेंसिंग नाम की घटना की वजह से चला था. जब एक गैलेक्सी का गुरुत्वाकर्षण उसके पीछे के प्रकाश अनियमित और बड़ा करता है, तो इससे टेलीस्कोप दूर की वस्तुओं को देख सकता है जो अमूमन बहुत धुंधली होती हैं.

इससे एक ही बार में अलग-अलग समय अवधियों से कई तस्वीरें मिलीं. सुपरनोवा में अलग-अलग क्षणों के प्रकाश ने लेंसिंग के ज़रिए अलग-अलग दूरी तय की और गैलेक्सी की ग्रैविटी बहुत ज्यादा होने की वजह से प्रकाश धीमा हो गया. टाइम लैप्स की मदद से शोधकर्ताओं ने सुपरनोवा के ठंडे होने की दर को मापा, साथ ही विस्फोट से पहले तारे के आकार की गणना भी की. उनका मानना है कि यह सूर्य से 500 गुना बड़ा लाल रंग का विशालकाय विस्फोट था. शोधकर्ताओं का कहना है कि आप तीन अलग-अलग तस्वीरों में अलग-अलग रंग देख सकते हैं. यह एक विशाल तारा है, जिसका कोर नष्ट हो गया है. यह एक शॉक पैदा कर रहा है, यह गर्म था और फिर एक सप्ताह में येह ठंडा हो गया. यह शायद सबसे आश्चर्यजनक चीजों में से एक है जिसे पहले कभी देखा गया है.



