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हाइब्रिड युद्ध: 21वीं सदी की अदृश्य चुनौती और भारत की सुरक्षा

यह छवि हाइब्रिड युद्ध की अवधारणा को दर्शाती है जिसमें साइबर हमले, सूचना युद्ध, आर्थिक दबाव और डिजिटल सुरक्षा शामिल हैं। यह आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और भारत की सुरक्षा रणनीति को समझाने में मदद करती है। इसमें यह दिखाया गया है कि कैसे तकनीक और डेटा आधुनिक युद्ध का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं और राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना पर नहीं बल्कि डिजिटल सिस्टम और नागरिक जागरूकता पर भी निर्भर करती है।
Homeअपना जौनपुरआवारा सांड़ के आतंक से ग्रामीण भयभीत, जिम्मेदार मौन

आवारा सांड़ के आतंक से ग्रामीण भयभीत, जिम्मेदार मौन

  • एसडीएम, बीडियो व सचिव को पत्रक भेज लगाई थी गुहार
  • कई लोगों पर हो चुका है जानलेवा हमला

जौनपुर धारा, केराकत। स्थानीय क्षेत्र में इन दिनों छुट्टा मवेशियों को लेकर हर कोई परेशान दिख रहा है। छुट्टा मवेशियों से बची फसल को किसानों ने तो काटकर रख लिया है पर छुट्टा मवेशी चिलचिलाती धूप में अपनी प्यास बुझाने के लिए गांवों के अंदर का रुख कर रहे हैं। चिलचिलाती धूप व गर्मी की बढ़त से छुट्टा मवेशियों में बौखलाहट काफी दिख रही है जिससे आये दिन सांड़ों व गायों द्वारा ग्रामीणों को दौड़ाते व मारते देखा जा रहा है। अकेले सरायबीरु ग्राम में मवेशियों द्वारा लगभग आधा दर्जन लोगों को घायल किया जा चुका है। आवारा छुट्टा पशुओं की संख्या क्षेत्र में काफी हद तक बढ़ गयी है जहाँ तहां पशुओं को देखा जा रहा है। किसी के गल्ले की दुकान में घुसते तो किसी सब्जी विक्रेता के दुकान पर धाबा बोलते दिख रहे हैं। पशुओं के हमलों से ग्रामीण काफी आहत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पशुपालन विभाग, तहसील प्रशासन व विकास खण्ड को पत्रक के माध्यम से अवगत करा दिया गया है पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सरायबीरू निवासी सत्यवान गुप्ता ने बताया कि गांव में एक आवारा पशु उग्र हो गया है जो कई लोगों को घायल कर चुका है। कुछ दिन पहले हमें घायल कर चुका है जिससे मेरी दो हड्डी फैक्चर हो गई थी जिस कारण दो महीने तक हमको बेड रेस्ट होना पड़ा। सरायबीरू निवासी सुधाकर सिंह ने बताया कि आवारा छुट्टा पशुओं से हम लोग इतना त्रस्त है कि आये दिन घर के बाहर व खेत खालियानों में फसलों को क्षति पहुंचने के साथ मानव क्षति भी पहुंचा रहे है। इसके पहले मेरे भाई पर भी छुट्टा पशु जानलेवा हमला कर चुका है इससे हम लोग काफी परेशान है जिसकी सूचना ब्लॉक के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि आवारा पशु सरायबीरु से लेकर मंडी तक घूम रहे हैं लेकिन कोई संज्ञान में नहीं ले रहा है। सरायबीरू निवासी हेमंत सिंह ने बताया कि स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के बजह से आवारा पशुओं का आतंक इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि फसलों को नुकसान करने के साथ साथ मानव क्षति भी पहुंचा रहे हैं। हमारे बगल के ही मास्टर पर एक पशु ने जान लेवा हमला कर दिया किसी तरह से उनकी जान बची सकी।

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