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अतीक अहमद के 44 साल के अपराध की कहानी 44 सेकंड में खत्म

प्रयागराज. माफिया से राजनेता बने पूर्व सांसद अतीक अहमद के 44 सालों के अपराध की कहानी प्रयागराज में शनिवार शाम को महज 44 सेकंड में उस वक्त हमेशा के लिए खत्म हो गई, जब तीन हमलावरों ने अतीक और उसके भाई अशरफ अहमद पर ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी. अतीक और अशरफ दोनों के शवों को रविवार रात यहां के कसारी मसारी कब्रिस्तान में कड़ी सुरक्षा के बीच सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया.

1979 में, महज 17 साल के आयु में अतीक पर इलाहाबाद, अब प्रयागराज में हत्या का आरोप लगाया गया था. जल्द ही वह राज्य में कई गैंगस्टरों का नेटवर्क चलाने लगा। उसका दबदबा धीरे-धीरे फूलपुर और कौशाम्बी सहित आसपास के इलाकों में फैल गया. 1989 में, जब उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी शौकत इलाही को पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया, तो अतीक अंडरवर्ल्ड का निर्विवाद बादशाह बन गया. उसी वर्ष, अतीक ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा और जीता. उसने 1989 से 2002 तक लगातार पांच बार इस सीट पर जीत हासिल की. पहली तीन बार निर्दलीय के रूप में, फिर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में और अंत में अपना दल के उम्मीदवार के रूप में. अपना दल के उम्मीदवार के रूप में जीतने के एक साल बाद, अतीक समाजवादी पार्टी में वापस चला गया और 2004 में फूलपुर लोकसभा सीट जीती. उसे इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा क्षेत्र को खाली करना पड़ा, जिसने राजू पाल की हत्या की घटनाओं की एक श्रृंखला को जन्म दिया. 24 फरवरी को उस घटना के एक मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या कर दी गई. अतीक को 2005 में राजू पाल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया और तीन साल बाद जमानत मिल गई. अतीक चाहे जेल में हो या बाहर, उसने उत्तर प्रदेश के अंडरवर्ल्ड पर अपना बोलबाला बनाए रखा और यह सुनिश्चित किया कि उसके लोगों की सुरक्षा हो. 2007 में, जब वह जेल में था, अतीक पर मदरसा के कुछ छात्राओं के सामूहिक बलात्कार में कथित रूप से शामिल अपने आदमियों को बचाने का आरोप लगाया गया था. इससे आक्रोश फैल गया और समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया. अतीक प्रतापगढ़ से अपना दल के उम्मीदवार के रूप में 2009 के संसदीय चुनाव भी हार गया, लेकिन चुनावी हार का मतलब यह नहीं था कि उसका दबदबा कम हो गया था. 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी वह राजू पाल की पत्नी पूजा पाल से चुनाव हार गया. फिर उसने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में श्रावस्ती से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन फिर हार गया.

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अतीक को गिरफ्तार नहीं करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी यूपी पुलिस को जमकर फटकार लगाई. इसके बाद अतीक की गिरफ्तारी हुई और तब से अतीक जेल में था. मार्च 2017 में, जब योगी आदित्यनाथ भाजपा सरकार में यूपी के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने ‘अपराधियों के साम्राज्य’ को ध्वस्त करने का वादा किया. अतीक को उसके गढ़ इलाहाबाद से राज्य की देवरिया जेल ले जाया गया. देवरिया जेल में अतीक ने अपना साम्राज्य चलाया और एक व्यापारी मोहित जायसवाल का अपहरण कराकर जेल में बुलवाया. उससे संपत्ति के कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और बेरहमी से पिटाई भी की. इसके बाद अतीक को बरेली जेल ले जाया गया, लेकिन जेल अधीक्षक डर गए और उसे वहां नहीं रखना चाहता थे. अप्रैल 2019 में कड़ी सख्ती के बीच योगी सरकार ने अतीक को प्रयागराज की नैनी जेल में शिफ्ट कर दिया. इस समय तक, सुप्रीम कोर्ट ने देवरिया जेल मामले में अपना फैसला सुना दिया और अतीक को गुजरात के साबरमती जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया. अतीक अहमद के खिलाफ जबरन वसूली, अपहरण और हत्या सहित 100 से अधिक मामले दर्ज थे, लेकिन राजू पाल की हत्या के एक गवाह उमेश पाल के अपहरण में उसे पहली बार सजा पिछले महीने मिली थी. विडंबना यह है कि उमेश पाल की हत्या के एक महीने बाद सजा सुनाई गई. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक राजू पाल की हत्या के मामले के मुख्य गवाह उमेश पाल और उनके दो पुलिस सुरक्षा गार्ड की 24 फरवरी को उनके धूमनगंज स्थित आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल की पत्नी जया पाल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर 25 फरवरी को अहमद, अशरफ, अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन, दो बेटों, गुड्डू मुस्लिम और गुलाम और नौ अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. अहमद और उसके भाई अशरफ को 2005 के उमेश पाल हत्याकांड के सिलसिले में सुनवाई के लिए प्रयागराज लाया गया था. उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम 2006 के उमेश पाल अपहरण मामले में अतीक और अशरफ को एक अदालत में पेश करने के लिए गुजरात के अहमदाबाद में उच्च सुरक्षा वाली साबरमती केंद्रीय जेल से 26 मार्च को प्रयागराज ले आई. अदालत ने 28 मार्च को अपहरण मामले में अहमद और दो अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. शनिवार की रात जब अस्पताल परिसर में तीन युवकों ने अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी, तो कइयों को इस घटना की भनक लग गई. अतीक ने खुद आशंका जताई थी कि उसे यूपी में मार दिया जाएगा, लेकिन उसके बेटे असद के मारे जाने के 72 घंटे के भीतर ऐसा हो जाएगा, इसकी उसने उम्मीद नहीं की थी.

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