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श्रमजीवी एक्सप्रेस में छूटे तीन बच्चे, जीआरपी ने मां से मिलाया

श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस में वाराणसी कैंट स्टेशन पर मां के ट्रेन से उतरने के बाद तीन बच्चे अकेले रह गए। जौनपुर जीआरपी ने चेकिंग के दौरान बच्चों को सुरक्षित बरामद किया और पहचान व तस्दीक के बाद उनकी मां से मिलाया।
Homeअपना जौनपुरपतियों के भरोसे रणक्षेत्र में भाग्य आजमा रही महिला प्रत्याशी

पतियों के भरोसे रणक्षेत्र में भाग्य आजमा रही महिला प्रत्याशी

  • चुनावी रण में सरकारी कर्मचारी भी पत्नी उम्मीदवार के लिये ठोक रहें ताल
  • प्रत्याशियों की पहचान बन रहे परिवार के पुरूष व पार्टियां

जौनपुर धारा, जौनपुर। महिला आरक्षण ने नगर पालिका अध्यक्ष और सभासद बनने का सपना संजोए तमाम नेताओं के मंसूबे पर पानी फिरने के उपरान्त परिवारवाद का पैतरा चलाया है। वहीं इस चुनाव में घर की चौखट लांघकर किसी भी सामाजिक कार्य में हिस्सा न लेने वालीं महिलाओं को भी दलों ने पहचान देकर चुनाव फतेह करने की कोशिश की हैं। इसमें एकाक चेहरे ऐसे भी है जो पिछले चुनावों में निर्दल और पार्टी के सिम्बल से चुनाव लड़कर भी पटखनी खा चुकीं है और उनके चुनाव में सरकारी कर्मचारी भी पूरे दम-खम से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। ऐसे में उन्हे सरकारी नौकरी की भी चिंता नहीं रह गई। तो वहीं सत्ता पक्ष ने ऐसे उम्मीदवार को टिकट दिया जिसे कभी समाजिक कार्यों में देखा भी नहीं गया। हांलाकि सत्ता पक्ष के मंत्री सहित तमाम नेताओं ने अपने प्रत्याशी को विजई बनाने के लिये पूरी ताकत झोंक दी है। जौनपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित  होने के कारण राजनैतिक पार्टियों ने चुनाव में प्रत्याशी उतारने को लेकर  काफी मंथन के बाद टिकट दिया। इन सीटों से चुनाव लड़ने की मंशा पालने वाले नेताओं ने परिवार की महिलाओं की दावेदारी ठोक कर चुनावी मैदान में उतार दिया है। जिसमें तमाम महिलाओं की क्षेत्र में इससे पहले कोई सक्रियता व सहभागिता नहीं रही। जिसमें भाजपा ने कार्यकर्ता रामसूरत मौर्या की पत्नी मनोरमा मौर्या, सपा ने कार्यकर्ता श्रवण जायसवाल की पत्नी उषा जायसवाल, कांग्रेस ने कार्यकर्ता इस्तेयाक की पत्नी दरख्शा खातून को तथा आम आदमा पार्टी ने कई पार्टियों से धूल फांक कर आई बिजली विभाग कर्मचारी नेता निखिलेश सिंह की पत्नी व टी.डी.कॉलेज प्रवक्ता चित्रलेखा सिंह को मैदान में उतारा है। चित्रलेखा सिंह ने पहला निकाय चुनाव 2012 में निर्दल लड़कर बूरी तरह से हारी व 2017 के निकाय चुनाव में कांग्रेस से चुनाव लड़कर लगभग 11560 वोटों के साथ ही सिमट गई और अपनी जमानत भी नहीं बचा पाईं। वहीं महिला आरक्षण सीट होने के बाद उन्होने पुनः चुनावी मैदान में कदम रख दिया है। उनके इस चुनाव में सरकारी कर्मचारियों ने भी तीसरी बार चुनाव अपने पक्ष में करने के लिये ताकत झोंक दी है। इस चुनाव में लगभग प्रत्याशियों की कहानी मिलती जुलती है। सत्ता पक्ष से लेकर अन्य सभी दलों के महिला उम्मीदवारों का क्षेत्र में लगभग सामाजिक कार्यों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा है। जिन महिलाओं ने सामाजिक कार्यों के लिये घर की चौखट भी नहीं लांघा होगा उन्हे चुनाव मैदान में डोर-टू-डोर जनसम्पर्क करना पड़ रहा है। वहीं जौनपुर की नगर पालिका सीट से लगातार 4 कार्यकाल बसपा के हाथ में ही रहा है। जिसमें तीन कार्यकाल पूर्व पालिकाध्यक्ष दिनेश टण्डन व चौथा कार्यकाल उनकी पत्नी माया टण्डन ने राज किया है। टण्डन परिवार ने चार कार्यकाल पूर्ण करने के बाद पांचवे कार्यकाल की भी भागीदारी हासिल करने बेताब हैं। पीछले कार्यकाल में दिनेश टण्डन से प्रभावित क्षेत्र की जनता ने माया टण्डन को मौका दिया जिसके बाद क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगातार बनीं रही लेकिन इनके अलावा अन्य महिला प्रत्याशियों ने तो घर की चौखट से बाहर निकलकर किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में भागीदारी तक नहीं दर्ज कराई थीं। इस वजह से क्षेत्र के लोग उन्हें चेहरे से भी नहीं पहचानते हैं। वहीं परिवार के पुरूष सदस्यों व पार्टी के कार्यकर्ताओं की पहचान से जानी जा रही है। तो वहीं प्रचार सामग्रियों में परिवार के पुरूष सदस्यों के फोटो, नाम व मोबाइल नम्बर तक का प्रयोग किया जा रहा है। बता दें लगभग राजनीतिक दलों में महिला पदाधिकारी व कार्यकत्री भी है क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी रहती है, सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह दिखती भी हैं, उन लोगों ने की भी टिकट के लिए मजबूती से दावेदारी की थी।