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निकाय चुनाव: नगर पंचायत खेतासराय अनारक्षित, प्रत्याशियों की लंबी कतार

  • वार्डों की आरक्षण सूची से कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल
  • जिले में चर्चित रहता है नगर पंचायत खेतासराय का चुनाव

जौनपुर धारा, खेतासराय। नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जिले में सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहने वाला नगर पंचायत खेतासराय का चुनाव होता है। इस बार भी चुनाव लड़ने वाले सम्भावित प्रत्याशी अपना उल्लू सीधा करने में लग गए है। आरक्षण सूची ने प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ा दी हैं लेकिन सूची से कहीं खुशी तो कहीं गम देखने को मिल रहा है। कितने तो इस उम्मीद में थे कि इस बार किसी भी कीमत पर जीत हासिल करनी ही है। इस बार अध्यक्ष पद के लिए सीट अनारक्षित हुई है। इसके पहले तीसरी बार महिला के लिए आरक्षित हुई थी। वार्डो की आरक्षण सूची ने काफी सम्भावित उम्मीदवारों के दिल की अरमां आसुओं में बहा दिए। ऐसे में राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले नेता आपत्ति दाखिल करने के लिए वार्डों में घूम-घूमकर सहमति और हस्ताक्षर कराकर आरक्षण बदलवाने के लिए एड़ी चोटी का दम लगाकर थक चुके, ताकि वार्ड की कमान किसी अन्य के हाथ में न चली जाए। लेकिन चाणक्य की सभी नीति धरी की धरी रह गई और और वार्डो की आरक्षण सूची बरकरार है।

  • सन 1999 में खेतासराय को मिला था नगर पंचायत का दर्जा

नगर पंचायत खेतासराय की बात करें तो इस क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा वर्ष 1999 में मिला था। इसका पहला निकाय चुनाव वर्ष 2000 में हुआ था। जिसमें निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे निवर्तमान चेयरमैन वसीम अहमद को विजयश्री हासिल हुई, जो खेतासराय नगर पंचायत के पहले चेयरमैन का रुतबा हासिल किए। एक आंकड़े के मुताबिक दो दशक बाद यहां पर कुल मतदाताआें की संख्या 15376, जिसमें महिला 7352 व 8015 पुरुष मतदाता हैं (जो घट बढ़ सकती है)। नगर पंचायत के कुल 13 वार्ड हैं। अब तक चार बार निकाय चुनाव हो चुका है। इस बार पांचवी बार सम्पन्न होगा। जिसमें से दो बार महिला के लिए सीट आरक्षित थी। इस बार पुन: महिला के लिए आरक्षित तो हुई, लेकिन आपत्ति के बाद अनारक्षित हो सकी। यहां अध्यक्ष पद की कुर्सी समाजवादी पार्टी के खाते में रहती है। पिछली बार चुनाव में भाजपा काफी उम्मीद में थी। राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव की साख भी दांव पर लगी थी। लेकिन बीजेपी की भीतरघात के चक्कर में स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी चारों खाने चित्त हो गई थी। इस बार देखना है अध्यक्ष पद की कुर्सी किस पार्टी के खाते में जाती है। यह भविष्य की गर्भ में है।

  • एक नजर पिछले चुनावों पर

नगर पंचायत खेतासराय का दर्जा मिलने के बाद पहला निकाय चुनाव सन 2000 में हुआ। जिसमें निर्दल के रूप में वसीम अहमद ताल ठोककर मैदान उतरे जो अपने प्रतिद्वंद्वी फारूक आजम को हराकर जीत हासिल किया था। बताया जाता है कि इस दौरान भारतीय जनता पार्टी से स्व. किशोरी लाल गुप्ता को टिकट मिला था। जिससे क्षुब्ध होकर पार्टी से बगावत करते हुए कृष्ण कुमार जायसवाल ने लोकतांत्रिक कांग्रेस से टिकट लेकर मैदान में उतरे थे। जिसमें हार का सामना करना पड़ा था। दूसरी बार चुनाव 2006 में होता है। इस बार अध्यक्ष पद की सीट महिला के लिए आरक्षित हुई। जिसमें पूर्व चेयरमैन की पत्नी महजबीन बानों ने समाजवादी पार्टी से ताल ठोंकी और पति के विकास कार्यों के बदौलत जीत हासिल की। प्रतिद्वंद्वी के रूप में निर्दल प्रत्याशी रही निर्मला गुप्ता पत्नी स्व. जंगबहादुर गुप्ता को हार का स्वाद चखना पड़ा। तत्कालीन समय में हिन्दू महासभा से ममता गुप्ता पत्नी डॉ. अमलेंद्र गुप्ता ने किस्मत दांव पर लगाई थी। इधर बीजेपी से टिकट लेकर आरती जायसवाल पत्नी कृष्ण कुमार जायसवाल भी मैदान में थी। उधर बसपा से हकीकुन निशां पत्नी फारूक आजम ताल ठोककर मैदान में थी और हार का सामना करना पड़ा। सन 2012 में तीसरी बार चुनाव का एलान हुआ। परिसीमन के बाद महिला के लिए सीट आरक्षित हुई तो एक बार पुन: समाजवादी पार्टी से टिकट लेकर महजबीन बानों ने फिर से ताल ठोकी। उधर उनके प्रतिद्वंद्वी निर्मला गुप्ता पत्नी स्व. जंग बहादुर गुप्ता निर्दल के रूप में मैदान में उतरी। जहां कड़ी टक्कर देते हुए नौ वोट से विजयी घोषित हुई और निर्मला ने वसीम को हैट्रिक लगाने से रोक दिया। बीजेपी ने यहां उषा मौर्या को टिकट देकर मैदान उतारा था जो एक सैकड़ा वोट में ही सिमटकर रह गई थीं। 2017 में भाजपा लहर के बीच निकाय चुनाव सम्पन्न हुआ। इस बार सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई। जिसमें प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारा। जिसमें कुल आठ प्रत्याशी मैदान में थे। सपा ने एक बार फिर वसीम अहमद पर भरोसा करके टिकट दिया। भाजपा ने संजीव गुप्ता को मैदान में उतारा। इधर कड़ी टक्कर देने के लिए निर्मला गुप्ता पत्नी स्व. जंग बहादुर गुप्ता भी मैदान में उतरीं, बसपा से विनीता मौर्या मैदान में रहीं, वहीं राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने फारूक आजम को टिकट देकर मैदान में उतारा। कांग्रेस ने युवा पर दांव लगाते हुए फहीम अहमद को मैदान में उतारा। इस चुनाव में वसीम अहमद ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्मला गुप्ता को परास्त कर जीत हासिल किया। बीजेपी लहर और योगी, मोदी फैक्टर के बावजूद भी भाजपा प्रत्याशी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। दूसरे स्थान पर रहीं निर्मला गुप्ता को छोड़कर कोई प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सका। 2023 में वार्डों के प्रस्तावित आरक्षण सूची निकाय चुनाव के लिए चुनौती के बाद अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण सीट में परिवर्तन होने के बाद शासन द्वारा आरक्षण की जो सूची जारी की गई है। वहीं वार्डों के लिए जारी आरक्षण सूची यथास्थिति बरकरार है। जिससे आरक्षण सम्भावित उम्मीदवारों में कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल देखने को मिल रहा है। नगर पंचायत खेतासराय के आरक्षण सूची क्रमश: वार्ड सरवरपुर (अनारक्षित), डोभी (अनारक्षित), पोस्टऑफिस (अनु. जाति महिला), बभनौटी (अनु. जाति), भारतीय विद्यापीठ (अनारक्षित), सोंधी (पिछड़ा वर्ग), कासिमपुर (अनारक्षित), चौहट्टा (अनारक्षित), गोलाबाजार (पिछड़ा वर्ग), कोहरौटी (महिला), जोगियाना (महिला), बारा (महिला), भटियारीसराय (पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षित है। परिसीमन के बाद जारी आरक्षण सूची के आधार पर सभासद के सम्भावित उम्मीदवारों की गणना फेल हो गई है, अन्य वार्डों में अपनी स्थिति को आकंलन कर रहे हैं। इसके लिए गुणा-गणित बैठाकर उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं। पिछली बार चुनाव में नगर पंचायत खेतासराय अध्यक्ष पद के लिए आठ प्रत्याशी तथा विभिन्न वार्डो से 78 प्रत्याशी मैदान में थे।

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