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E-Paper 07-05-2026

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दूसरे दिन से ही स्पिनर्स को मिल रही है पिच से मदद

भारत और इंग्लैंड के बीच रांची में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला खेला जा रहा है. इस टेस्ट के दूसरे दिन से ही स्पिनर्स को पिच से मदद मिल रही है. हालांकि, भारत के बॉलिंग कोच पारस म्हाम्ब्रे का कहना है कि यहां कि पिच रैंक टर्नर यानी स्पिनर्स की मददगार नहीं थी.  

रांची टेस्ट में इंग्लैंड ने पहली पारी में 353 रन बनाए. इसके जवाब में दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया ने 219 रनों पर सात विकेट गंवा दिए हैं.  इंग्लैंड के लिए ऑफ स्पिनर शोएब बशीर ने 84 रन देकर चार विकेट झटके. पारस म्हाम्ब्रे ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट के दूसरे दिन का खेल समाप्त होने के बाद कहा, “यहां पर हमने पहले जो मैच खेले हैं, उन्हें देखते हुए जैसे जैसे खेल आगे बढ़ता है, इसका विकेट धीमा होता जाता है. इसकी प्रकृति के हिसाब से यह धीमा हो जाता है. हमें इसकी उम्मीद थी, लेकिन सच कहूं तो हमने यह नहीं सोचा था कि यह दूसरे दिन से ही इतना धीमा हो जायेगा. इस तरह के अलग तरह के उछाल की उम्मीद नहीं थी.

म्हाम्ब्रे ने आगे कहा, “मैं अभी इसे ‘रैंक टर्नर’ नहीं कहूंगा, क्योंकि उछाल नीचा है जिससे बल्लेबाजी करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण है. मुझे नहीं लगता कि इतनी ज्यादा गेंद तेजी से स्पिन हुई थीं या इन्हें खेलना मुश्किल था.”

गेंदबाजी कोच ने कहा कि टीम प्रबंधन की पिच तैयार करने में कोई भूमिका नहीं थी, क्योंकि यह स्थानीय संघ के ही अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने कहा, “पहले तो हमारा वेन्यू पर कोई नियंत्रण नहीं होता है. यहां जिस तरह का विकेट होता है, यह हमेशा ऐसा ही रहता है, कभी भी ‘रैंक टर्नर’ नहीं होता. यह ही पिच की प्रकृति है. हमारी टीम ने कोई विशेष निर्देश नहीं दिया था कि हम ‘रैंक टर्नर’ पर खेलना चाहते हैं. निश्चित रूप से यहां की मिट्टी राजकोट से अलग है.

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