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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeअपना जौनपुरजिला निर्वाचन अधिकारी ने बीडीओ को दी चेतावनी

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बीडीओ को दी चेतावनी

जौनपुर धारा, सरायख्खाजा। जिलाधिकारी/निर्वाचन अधिकारी ने बीडीओ शाहगंज सोंधी को पत्र लिखकर मेहरावां ग्राम पंचायत के निर्विरोध निर्वाचित सदस्यों के मामले को गंभीरता से लेकर मामले को निपटाने को कहा है। निर्वाचन अधिकारी ने यह भी निर्देश दिया है कि आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई जानकारी को अविलंब दें। गौरतलब है कि 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में मेहरावां गांव के ग्राम पंचायत सदस्यों के निर्वाचन चार वार्डों में महेन्द्र बिन्द लीलादेवी बीरेंद्र कुमार तथा पुष्पा देवी ने अपने अपने वार्डों से एक मात्र प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया था। जिसके बाद चारों वार्डों से सभी लोगों को निर्विरोध निर्वाचित कर दिया गया। लेकिन बाद में एक प्रभावशाली पूर्व प्रधान के दबाव में अधिकारियों ने धांधली करके उन सभी स्थानों से नामांकन पत्र को गायब कर दूसरे लोगों को निर्विरोध सदस्य घोषित कर दिया। पंचायत चुनाव में धांधली और घपले को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता सुरेन्द्र सिंह एवं महेंद्र विन्द एडवोकेट ने ग्राम पंचायत अधिकारी विकास खंड अधिकारी एवं सहायक विकास अधिकारी पंचायत पर धांधली एवं घपले का गंभीर आरोप लगाते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं चुनाव आयोग को शिकायत दर्ज कराई लेकिन सम्बन्धित अधिकारियों ने मामले को निपटाने के बजाय मामले को घुमाने में लगें रहे लेकिन शिकायतकर्ताओं ने हार नहीं मानी निर्वाचन आयोग द्वारा मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर अविलंब मामले को निबटाने तथा आरटीआई कार्यकर्ताओ को मांगी गई जानकारी को अविलंब देने का आदेश दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बीडीओ शाहगंज सोंधी को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि उक्त प्रकरण को शीघ्र निपटारा किया जाय, अन्यथा की स्थिति में बीडीओ समेत ग्राम पंचायत अधिकारी समेत आरोपित अधिकारियों को दंडित करने की चेतावनी दी है। इसके बाद विभाग में हड़कंप मचा है। अब देखना यह है कि मामले में कोई हल निकलता है या फिर अधिकारी घुमाने का कोइ नियम इजात वâरते हैं।